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विविध प्रकार के संसाधनों के स्रोत हैं महासागर, इन्हें प्रदूषित होने से बचाने प्रति होना होगा जागरूक : डाॅ० गणेश पाठक
June 8, 2020 • परिवर्तन चक्र

आज 8 जून को विश्व महासागर दिवस पर विशेष :-

महासागर विविध प्रकार के संसाधनों के स्रोत हैं, जिनमें खनिज संसाधन, जैविक संसाधन एवं समुद्री पादप संसाधन मुख्य हैं। यही नहीं समुद्र विविन्न बहुमूल्य रत्नों की खान भी हैं। यही कारण है कि देवताओं द्वारा समुद्रमंधन कर 14 रत्नों की प्राप्ति की गयी थी। किन्तु आज अथाह जलराशि वाले इन महासागरों का जल भी अब प्रदूषित होता जा यहा है।  

महासगरों में बढ़ते इस प्रदूषण को बचाने हेतु ही जन जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र महासभा में 2008 में यह निर्णय लिया गया कि 2009 से प्रति वर्ष 8 जून कै विश्व महासागर दिवस मनाकर जनजागरूकता पैदा की जाय।

विश्व महासागर दिवस मनाने हेतु प्रति वर्ष एक विशेष थीम रखी जाती है और पूरे वर्ष उसी थीम के उद्देश्यों के आधार पर विभिन्न कार्यक्रमों को संचालित कर जनजागरूकता उत्पन्न किया जाता है। इस वर्ष अर्थात् 2020 की थीम है " एक सतत महासागर के लिए नवाचार"। इस थीम के आधार पर ही पूरे वर्ष भर कार्यक्रम संचालित किये जायेंगें।

महासागर विभिन्न प्रकार खनिज संसाधनों सहित, जैविक संसाधनों, समुद्री पादप संसाधनों अर्थात् समुद्री वनस्पतियों, अनेक प्रकार की औषधियों एवं बहुमूल्य रत्नों के असीम भण्डार हैं। यही नहीं ये महासागर मौसम एवं जलवायु को भी निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किन्तु दुःख तो इस बात का है कि ऐसे महत्वपूर्ण अथाह जलराशि वाले महासागरों का जल भी अब हमारी गतिविधियों के कारण प्रदूषित होता जा रहा है। विश्व की लगभग 30 प्रतिशत जनसंख्या समुद्री तटवर्ती क्षेत्रों में रहती है, जिनका कूड़ा- कचरा एवं समुद्रों के किनारे स्थित उद्योगों से निःसृत विषैला कचरा बिना उपचारित किए ही समुद्रों में गिराया जाता है, जिससे समुद्री जल प्रदूषित होता जा रहा है। यही नहीं नदियों के माध्यम से नदियों के किनारे बसे नगरों का कूड़ा-कचरा एवं गंदगी भी समुद्रों तक पहुँचता रहता है। इसके साथ ही साथ समुद्री परिवहन के चलते भी समुद्री जल प्रदूषित हो रहा है।

खासतौर से पेट्रोलियम पदार्थों के परिवहन से पेट्रोलियम पदार्थ तेल टैंकरों से रिस-रिस कर समुद्री जल में मिलकर प्रदूषण फैलाता रहता है। कभी-कभी दो तेल टैंकरों के आपस में टकरा जाने से क्षतिग्रस्त होने एवं डूब जाने से पेट्रोलियम पदार्थ समुद्री जल सतह पर फैल जाता है और कभी-कभी आग भी लग जाया करती है, जिससे समुद्री जीवों के लिए भी संकट उत्पन्न हो जाता है।

यह नहीं वर्तमान समय में हो रहे ग्लोबल वार्मिंग के चलते ग्लेशियरों का जल पिघलकर नदियों के माध्यम से समुद्रों में पहुँचकर समुद्री जल स्तर में वृद्धि कर रहा है, जिससे समुद्र तटवर्ती क्षेत्रों के डूबने का भी खतरा बढ़ता जा रहा है, जिससे भयंकर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इन सबको देखते हुए विश्व समुद्री दिवस की उपादेयता काफी बढ़ जाती है। कारण कि जागरूकता ही बचाव का एक शसक्त माध्यम है।