ALL क्राइम न्यूज स्वास्थ्य घरेलू नुस्खे उत्तर प्रदेश अध्यात्म कोरोना वायरस देश बलिया समाचार दुष्कर्म मनोरंजन
तीसरी बार बढ़ाई गई रासुका की अवधि, जेल में ही रहना होगा डॉ. कफील को
August 18, 2020 • परिवर्तन चक्र


    
डॉ. कफील को जेल से रिहा कराने के लिए कुछ दिनों पहले प्रियंका गांधी की तरफ से एक पत्र उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया था. प्रियंका गांधी ने उस पत्र में डा. कफील को रिहा करने का आग्रह किया था. मगर डॉ. कफील को अपने गुनाहों के चलते फिलहाल जेल में ही रहना होगा

डॉ. कफील को मुम्बई से उत्तर प्रदेश की एसटीएफ ने 30 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया था. उसके बाद कफील को उत्तर प्रदेश की मथुरा जेल में रखा गया था. जनपद न्यायालय से उन्हें जमानत मिल गई थी. उसी दौरान फरवरी माह में कफील के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के अंतर्गत कार्रवाई की गई. 12 मई को रासुका की अवधि समाप्त हो रही थी. प्रदेश सरकार ने कफील के खिलाफ रासुका की अवधि तीन माह के लिए बढ़ाया था. अब तीसरी बार कफील के खिलाफ रासुका की अवधि को बढ़ाया गया है. कफील को 17 नवंबर तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.

उल्लेखनीय है कि डॉ. कफील गोरखपुर से छिपकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पहुंचा था. 12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शामिल हुआ. देश और संविधान के बारे में आपत्तिजनक बयान दिया. इसके बाद कफील के खिलाफ अलीगढ़ में एफआईआर दर्ज की गई थी. कफील ने अलीगढ़ में कहा था कि "जब मैं गिरफ्तार किया गया था. तब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बंद हुआ था. यहां पर विरोध हुआ था. मैं कैसे ना आता. हर हाल में यहां पर पहुंचना, मेरा फर्ज बनता था.”

कफील ने वहां पर मौजूद छात्रों को संबोधित किया था. नफरत फ़ैलाने वाले अपने भाषण में कहा था कि "पहले एक गाना गाया जाता था -- ना हिन्दू बनेगा , ना मुसलमान बनेगा , इंसान की औलाद है इंसान बनेगा . और अब हमारा मोटा भाई हमें सिखाता है - हिन्दू बनेगा , मुसलमान बनेगा , सिर्फ हिन्दू बनेगा, सिर्फ मुसलमान बनेगा. इंसान नहीं बनेगा. वो क्या जानें ! संविधान का मतलब, हमारे संविधान पर उन्हें भरोसा ही नहीं है. हम जो बार-बार ये कहते हैं कि गृह मंत्री जी आप ये जो क़ानून लाये हैं. ये गैर संवैधानिक है. हमें यह समझना चाहिए कि हम किससे बात कर रहें हैं. हम उससे बात कर रहे हैं जिन्होंने बाबा साहब के संविधान को कभी माना ही नहीं, कभी पढ़ा ही नहीं."

पहली बार कफील का कारनामा तब सामने आया था जब 10 और 11 अगस्त वर्ष 2017 को बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में 32 मासूम एवं 18 अन्य गंभीर मरीजों की मृत्यु हो गई थी. बगैर किसी प्रकार की जांच कराए कफील ने टी.वी चैनलों पर यह बयान दे दिया था कि “बच्चों की मृत्यु आक्सीजन की कमी से हुई थी.” टी.वी चैनलों पर यह दृश्य दिखाया गया था कि आक्सीजन सिलेंडर कम पड़ जाने के बाद कफील ने निजी अस्पताल से आक्सीजन सिलेंडर मंगवाए. जब कफील खुद परचेज कमेटी में था. कफील ने आक्सीजन सिलेंडर इसलिए नहीं खरीदा क्योंकि वह उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करना चाहता था.