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सच्चे कर्मयोगी थे पं० अमर नाथ मिश्र : डाॅ० गणेश पाठक
July 4, 2020 • परिवर्तन चक्र

94वीं जयंती पर विशेष

बलिया। द्वाबा के मालवीय कहे जाने वाले स्वतंत्रता सेनानी पं० अमरनाथ मिश्र एक सच्चे  कर्मयोगी थे। वे न केवल स्वतंत्रता सेनानी थे, बल्कि एक सच्चे कर्मयोगी के रूप में शैक्षिक उन्नयन के प्रणेता, सच्चे समाज सेवी, राजनीतिज्ञ, धार्मिक- आध्यात्मिक उत्थान के प्रणेता एवं एक विकास पुरूष थे। वास्तव में वे एक बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी मनीषी थे। उनके शब्दकोश में असम्भव नाम का कोई शब्द नहीं था।

पं० अमरनाथ मिश्र एक सहृदय, सहनशील, सहयोगी, सत्कर्म के पथ पर चलने वाले एवं साधना में लीन रहने वाले व्यक्ति थे। वे समग्र विकास के पुरोधा थे, जिसके तहत उन्होंने सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सांस्कृतिक तथा धार्मिक-आध्यात्मिक प्रत्येक क्षेत्र में ऐसे कार्य किए हैं कि उनकी मिशाल दी जाती है। उन्होंने अनेक विद्यालयों की स्थापना की, जिसमें प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के शिक्षा केन्द्र हैं। उनके द्वारा अपने गाँव में चिकित्सकालय की भी स्थापन कराई गयी है तथा कन्या विद्यालय भी स्थापित किया गया है। हरिद्वार में, अयोध्या में एवं बद्रीनाथ में उनके द्वारा धर्मशालाओं की भी स्थापना की गयी है।

यह संयोग ही कहा जायेगा कि उनका अवतरण एवं अवशान आषाण मास की पूर्णिमा को ही हुआ था। ऐसा संयोग मनीषी पुरूष को ही मिलता है। उनका इस धरा पर अवतरण बलिया के बलिहार गाँव में हुआ था। वे बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि के थे। अपनी तरूणाई को उन्होंने देश को समर्पित करने में सौंप दिया और आजीवन देश सेवा की  एवं समाज सेवा की ही बात सोचते रहे। अंत में गुरूपूर्णिमा के दिन 20 जुलाई, 2005 को उनहोंने अपनी इहलीला समाप्त कर दी। किन्तु पं० मिश्र जी आज भी अपने कार्यों से हमारे बीच हैं और सदैव हमारे बीच में रहेंगें। आज उनकी 94वीं जयंती पर उनको शत- शत नमन। कोरोना वायरस से उत्पन्न संकट एवं लाँकडाउन के चलते इस वर्ष जयंती पर विस्तृत कार्यक्रम न करके सिर्फ माल्यार्पण ही किया जायेगा।