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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मारने की कोशिश! भेजा गया जहर वाला खत
September 20, 2020 • परिवर्तन चक्र

अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, अगर कोई व्यक्ति इस जहर के संपर्क में आता है, तो दी गई मात्रा के अनुसार उसकी 36 से 72 घंटों में मौत हो सकती है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नाम पर भेजे गए ‘राइसिन’ जहर से भरे एक पत्र को व्हाइट हाउस पहुंचने से पहले ही रोक लिया। अधिकारियों के मुताबिक, इस चिट्ठी को व्हाइट हाउस में डाक की जांच करने वाली स्क्रीनिंग फैसिलिटी में पकड़ा गया। अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि जांच एजेंसी एफबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह लिफाफा कहां से आया है और इसे किसने भेजा है।

बताया गया है कि एफबीआई, सीक्रेट सर्विस और अमेरिकी डाक निरीक्षण सेवा जांच का नेतृत्व कर रहे हैं। एफबीआई ने एक बयान में कहा कि उसके एजेंट्स अमेरिकी सरकारी डाक प्रतिष्ठान पर आए एक संदिग्ध पत्र के बारे में पड़ताल कर रहे हैं और इससे सार्वजनिक सुरक्षा के लिए कोई खतरा नहीं है। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में एक जांचकर्ता ने बताया कि आशंका है कि ये पैकेज कनाडा से आया हो। इस पर रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा कि वह जांच में एफबीआई का पूरा साथ दे रही है।

राइसिन के संपर्क में आने वालों की 36 से 72 घंटे में हो सकती है मौत : अधिकारियों के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में चिट्ठी में राइसिन होने की पुष्टि हुई है। यह कैस्टर सीड (अरण्डी के बीज) में स्वाभाविक रूप से पाया जाने वाला विषैला पदार्थ है। चौंकाने वाली बात यह है कि राइसिन के लिए अब तक किसी एंटीडोट की पहचान नहीं हो पाई है। अगर कोई व्यक्ति इस जहर के संपर्क में आता है, तो दी गई मात्रा के अनुसार उसकी 36 से 72 घंटों में मौत हो सकती है। अमेरिकी सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, इस जहर को पहले भी कई आतंकी साजिशों में इस्तेमाल किया गया है।

व्हाइट हाउस को पहले भी भेजा गया है जहर : गौरतलब है कि नौसेना के एक वरिष्ठ कर्मचारी को ट्रंप और उनके प्रशासन के सदस्यों को इसी प्रकार के लिफाफे भेजने के आरोप में 2018 में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले 2014 में मिस्सीसिपी के एक व्यक्ति को तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओामा को राइसिन से भरी चिट्ठी भेजने के लिए 25 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
साभार- जनसत्ता