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पुराने रास्ते पर लौट रहे हैं सूबे के मुख्यमंत्री, समाजवादी दंगा रोकने के लिए बड़ी बड़ी कुर्बानी देने को तैयार रहें : रामगोविन्द चौधरी
October 5, 2020 • परिवर्तन चक्र

लखनऊ। नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में अपहरण करके फिरौती न मिलने पर हत्या, लूट, डकैती के साथ रोज रोज मर्डर और बीमार प्रदेश में बदलने के बाद मुख्यमन्त्री माननीय योगी श्री आदित्य नाथ अपने पुराने रास्ते पर लौट रहे हैं। इसे लेकर सूबे के लोग सावधान रहें और किसी भी कीमत पर आपसी सदभाव और भाईचारे का माहौल बनाए रखने की कोशिश करें। खासतौर से समाजवादी पार्टी के साथी मुख्यमन्त्री योगी श्री आदित्य नाथ और उनकी टीम की ओर से होने वाले दंगों को रोकने के लिए बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने के लिए तैयार रहें।

याद रहे कि मुख्यमन्त्री योगी श्री आदित्यनाथ ने उपचुनाव को लेकर रविवार/सोमवार को जारी एक बयान में कहा है कि विकास नहीं पसन्द करने वाले जातीय व साम्प्रदायिक दंगा भड़काने की साजिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता विपक्ष के इस षड्यंत्र का पर्दाफाश करें। इसे लेकर नेता प्रतिपक्ष चौधरी ने सोमवार को जारी एक प्रेसनोट में कहा है कि सूबे के लोग मुख्यमन्त्री योगी श्री आदित्यनाथ के पुराने रिकार्ड को याद करें। उन्होंने बतौर मुख्यमन्त्री अपने ऊपर लगे मामलों को वापस नहीं लिया होता तो वह आज इस बड़ी कुर्सी की जगह खुद कानून की गिरफ्त में होते। मुख्यमन्त्री होने के बाद भी योगी श्री आदित्यनाथ जी कानून के शिकंजे को भूले नहीं हैं। इसलिए वह कानून का राज स्थापित करने की जगह कानून की मर्यादा को तार तार कर रहे हैं। इसे लेकर केवल विपक्ष नहीं, पक्ष के भी संवेदनशील और समझदार लोगों को भी सावधान रहने की जरूरत है।

नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश रामगोविन्द चौधरी ने कहा है कि सूबे के लोग इस समय केवल एक मांग कर रहे हैं, सूबे में कानून व्यवस्था का शासन बहाल हो, बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। लोगों की इस मांग की आवाज समाजवादी पार्टी और विपक्ष मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाना चाहता है और वह हैं कि इस आवाज को सुनना ही नहीं चाहते हैं। यही नहीं, वह और उनकी टीम समाजवादी पार्टी और विपक्ष के माध्यम से उठ रही इस आवाज को बर्बर दमन और गिरफ्तारी के बल पर कुचल देने की कोशिश में लगी हुई है। उन्होंने कहा है कि बर्बर दमन और गिरफ्तारी के बाद भी आम आदमी की यह आवाज दब नहीं रही है। खुद उनकी भी पार्टी के संवेदनशील और समझदार लोग प्रतिरोध की इस आवाज का हृदय से समर्थन कर रहे हैं। इस स्थिति से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए अचानक मुख्यमन्त्री को दंगा दंगा खेलने के अपने पुराने खेल का बोध हुआ है जिसे कुछ लोगों और विपक्ष पर आरोप के बहाने उन्होंने व्यक्त कर दिया है। इसे लेकर सूबे के हर संवेदनशील और समझदार आदमी को सावधान रहने की जरूरत है एवं मुख्यमंत्री अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अपनी पार्टी के लोगों को उकसा कर जातीय व साम्प्रदायिक दंगा कराने की साजिश का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए जनता होशियार रहे