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प्रदेश सरकार ने विकास की लाइफ लाइन कही जाने वाली सड़कों का बिछाया जाल
October 24, 2020 • परिवर्तन चक्र • उत्तर प्रदेश

बलिया। सड़कों को विकास की जीवन रेखा कहा जाता है। क्योंकि यदि किसी क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करना है तो उस क्षेत्र में सड़क का निर्माण करा दिया जाय, तो उस क्षेत्र का विकास स्वतः हो जायेगा। उ0प्र0 के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने जब प्रदेश की बागडोर संभाली थी तभी उन्होंने कहा था कि हम प्रत्येक बस्ती, गांव, ब्लाक एवं जनपद को इस तरह जोडेंगे कि किसी भी मरीज के अस्पताल जाने, छात्र-छात्राओं को स्कूल कालेज जाने, किसान को अपनी उपज बेचने मण्डी जाने, उद्योगों, व्यवसायों की स्थापना के लिए तथा आम नागरिकों को आवागमन की परेशानी नहीं होगी। अपने अब तक के कार्यकाल में मुख्यमंत्री जी ने गांवो, मजरों में सम्पर्क मार्गों का निर्माण कराकर सीधे मुख्यमार्गों से जोड़कर हर तरह के आवागमन को सुचारू और सुगम बना दिया है। वहीं प्रदेश में एक्सप्रेस-वे के निर्माण से देश के अन्य राज्यों से प्रदेश को जोड़कर औद्योगिक और व्यापारिक गति में तेजी लाई है।

प्रदेश के लोक निर्माण विभाग द्वारा ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं ब्लाॅक व तहसीलों के मार्गों को चैड़ीकरण करते हुए आवागमन को सुगम बनाया है। विभाग द्वारा नवीन सड़कों का निर्माण रखरखाव, मरम्मत, चैड़ीकरण, नेशनल हाईवे की मरम्मत तथा रखरखाव, विभिन्न सेतुओं का निर्माण, सरकारी भवनों का निर्माण तथा रखरखाव आदि महत्वपूर्ण कार्य मानक एवं गुणवत्तापूर्ण किये जाते हैं। वर्ष 2001 एवं वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर 250 से अधिक आबादी के ग्रामों को सम्पर्क मार्गों से जोड़ने का कार्य प्रदेश सरकार ने तेजी से कराये हैं। इसके साथ ही खराब व टूटी सड़कों की मरम्मत कराकर गड्ढामुक्त किया गया है। प्रदेश सरकार ने अब तक हजारों राजस्व ग्रामों को सम्पर्क मार्गों से जोड़ते हुए 11259 किलोमीटर लम्बाई की ग्रामीण मार्गों का निर्माण कराया है तथा तहसीलों, विकासखण्डों के मार्गों को टू-लेन में बनाते हुए चैड़ीकरण कर 12600 किलोमीटर लम्बाई के मार्गों का चैड़ीकरण/सुदृढ़ीकरण का कार्य कराया गया है।

प्रतिभा एवं शिक्षा को प्रोत्साहन - प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में पहली बार प्रतिभा, शिक्षा एवं विकास का समावेश करते हुए हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करते हुए उनके निवास स्थल तक मार्ग का निर्माण/मरम्मत कर ‘‘डा0 ए0पी0जे0 अब्दुल कलाम गौरव पथ’’ के रूप में विकसित कर अभिनव योजना लागू की है। अब तक निर्गत बोर्ड परीक्षा परिणामों के आधार पर 210 मेधावी छात्रों के निवास तक सड़क बनायी जा रही है, जिसमें 108 सड़कें बन गई हैं। शेष निर्माणाधीन हैं।

प्रदेश सरकार ने प्रदेश में पहली बार राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों को सम्मानित एवं प्रोत्साहित करने हेतु खिलाड़ियों के निवास/ग्राम तक मार्ग का निर्माण कर ‘‘मेजर ध्यान चंद विजय पथ’’ के नाम से अभिनव योजना लागू की है। इस योजना के अन्तर्गत इस वर्ष 19 खिलाड़ियों के निवास/ग्रामों तक मार्ग का निर्माण किया जा रहा है।

देश के बलिदानी शहीदों का सम्मान -देश की रक्षा करते हुए सीमा पर शहीद हुए बलिदानी शहीदों को सम्मान देते हुए उनके घर/गांव तक सड़क का निर्माण/मरम्मत करते हुए ‘‘जय हिन्द वीर पथ’’ योजना प्रदेश सरकार ने प्रारम्भ की है। प्रदेश में ऐसे शहीदों के नाम से उनके घर तक सर्वऋतु मार्ग निर्माण का कार्य किया जा रहा है, जो उनके बलिदान की शौर्यगाथा को दर्शाती रहेगी। प्रदेश में 39 शहीदों के घर तक सड़क बनाई जा रही है, जिसमें 17 सड़कें बन गई हैं, शेष निर्माणाधीन हैं।

हर्बल मार्गों का विकास - प्रदेश में लोक निर्माण विभाग द्वारा सभी जनपदों के प्रत्येक खण्डों में एक-एक हर्बल मार्ग विकसित किया जा रहा है, जिनमें मार्गों के किनारे हर्बल पौधे रोपित किये जा रहे हैं। प्रदेश के 75 जनपदों के सभी 175 खण्डों में हर्बल मार्ग का चयन करते हुए 31253 हर्बल पौधे रोपित किये जा चुके हैं। अवशेष मार्गों पर पौधरोपण का कार्य चल रहा है।

नवीन तकनीक व पर्यावरण संरक्षण - प्रदेश में मार्ग निर्माण की नवीनतम तकनीक देश एवं विदेशों में उपलब्ध नवीनतम मशीनों का बड़े पैमाने पर प्रयोग करने हेतु लखनऊ में कांफ्रेेंस का आयोजन किया, जिसमें देश के प्रतिष्ठित संस्थानों आई.आई.टी. कानपुर, दिल्ली, खड़गपुर, मुम्बई, रूड़की, वाराणसी, केन्द्रीय अनुसंधान संस्थान दिल्ली के निदेशक, वैज्ञानिक, तकनीकी विशेषज्ञ सहित जर्मनी एवं ब्रिटेन के विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभाग करते हुए नई तकनीक के विषय में विस्तृत रूप से अवगत कराया गया। सड़कों के निर्माण में नवीन तकनीक का प्रयोग किया गया, जिसमें लागत और सामग्री की खपत में 20 से 25 प्रतिशत सामग्री की कमी आयी। नवीन तकनीक के प्रयोग से लगभग 1200 करोड़ रुपये की बचत एवं 15.4 लाख टन कार्बन उत्सर्जन की बचत हुई तथा पर्यावरण संरक्षण को भी भरपूर सहयोग मिला। प्रदेश में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए ‘‘सिंगल यूज़ वेस्ट प्लास्टिक’’ का उपयोग कर नवीन तकनीक से प्लास्टिक की सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। प्रदेश में अब तक 91.69 किलोमीटर तथा 18.91 करोड़ रुपये की लागत की 72 प्लास्टिक मार्गों के निर्माण/नवीनीकरण के कार्य कराये जा रहे हैं, जिनमें 22 सड़कों का निर्माण हो चुका है।