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प्रभावी पौधारोपण हेतु जन-जन की सहभागिता एवं स्वचेतना जागृति होना आवश्यक : डाॅ० गणेश पाठक
July 6, 2020 • परिवर्तन चक्र

बलिया। पौधारोपण को बढ़ावा देने हेतु लाख कोशिशों के बावजूद भी यह अपने उद्देश्य में प्रभावी ढंग से सफल नहीं हो पारहा है। जिसका मुख्य कारण यह कि अपने देश में स्थानीय, क्षेत्रीय, प्रादेशिक  एवं राष्ट्रीय स्तर पर जो पौधारोपण किया जाता है, उसका उद्देश्य पूर्णतः सफल नहीं हो पा रहा है। पौधे तो लगाए जाते हैं, किन्तु उनकी सुरक्षा, संरक्षा न होने के कारण उनमें अधिकांश नष्ट हो जाते हैं। 

प्रभावी ढंग से पौधारोपण हेतु सबसे आवश्यक यह है कि इसे जनान्दोलन बनाया जाय। जो वृक्षारोपण सरकारी तौर पर सामाजिक वन विभाग द्वारा किया जाता है, उसकी भी मानिटरिंग स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा हो और उसमें स्वयं सेवी सस्थाएँ शामिल रहें। वृक्षारोपण को निचले स्तर अर्थात् परिवार स्तर से प्रभावी बनाते हुए जन-जन को उससे जोड़ा जाय और जौ पौध लगाए जाँय उनकी सुरक्षा एवं संरक्षण की जिम्मेवारी उस गाँव के व्यक्ति को ही दिया जाय। वर्ष में एक बार वन महोत्सव के समय या तो प्रेरित कर अथवा कानूनतः पालन कराकर एक प्रतयेक व्यक्ति से  एक वृक्ष अवश्य लगवाया जाय।

भारतीय संस्कृति में निहित "वृक्षदेवो भव" की विचारधारा से सबको अवगत  कराकर वृक्ष संरक्षण की भावना को बल प्रदान किया जा सकता है। प्रत्येक पर्व, त्यौहार, जन्मदिन, शादी की सालगिरह एवं राष्ट्रीय पर्वों पर अनिवार्य रूप से पौधारोपण किया जाय। यदि हम कहीं यात्रा पर जाते हैं तो अपने साथ पौधों के कुछ बीज अवश्य रख लें, जिसे कहीं बंजर या सार्वजनिक रूप से खाली स्थान पर उसको छोड़ देने से उसमें से निश्चित ही कुछ पौधे उग आयेंगे और क्षेत्र को हरा - भरा बनाने में सहयोग प्रदान कररेंगे। इस तरह उपर्युक्त उपायों द्वारा निश्चित ही हम पौधारोपण को प्रभावी बना सकते हैं और धरा को हरा -भरा बना सकते हैं।