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पूर्वोत्तर रेलवे राजभाषा विभाग के तत्त्वावधान में कवि सम्मेलन का हुआ आयोजन
September 18, 2020 • परिवर्तन चक्र

गोरखपुर 18 सितम्बर, 2020। पूर्वोत्तर रेलवे राजभाषा विभाग के तत्त्वावधान में मुख्यालय, गोरखपुर में 14 से 18 सितम्बर, 2020 तक मनाये जा रहे राजभाषा सप्ताह समारोह-2020 के आयोजन के क्रम में अंतिम दिन 18 सितम्बर, 2020 को मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में कवि सम्मेलन का आयोजन वर्चुअल रूप से किया गया। कवि सम्मेलन का आरम्भ श्रीमती निशा राय द्वारा मां सरस्वती वंदना किया गया।

      मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि आज का कवि सम्मेलन बहुत रोचक एक सरस रहां उन्होंने कहा कि कविता वह प्रभावशाली हथियार है जो क्षण भर में समाज की सोच को बदल सकती है। श्री पाण्डेय ने राजभाषा सप्ताह के सफल आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की।

       कवि सम्मेलन में आमंत्रित कवियों डा. चारूशिला सिंह, श्री राजेश राज, श्री भूषण त्यागी, श्रीमती निशा राय, श्री प्रभाकर मिश्र एवं श्री पी.के. दीवाना, बरेली एवं श्री देवेन्द्र नटखद, झांसी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

                              गोरखपुर की डा. चारूशिला सिंह ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि-

                              सामने स्वप्न का अब भी आकाष है, मिल ही जाएगा हमको ये विश्वास है।

                              पतझड़ों के भी मौसम बनेंगे सुखद, दृष्टि में आज भी जिंदा मधुमास है।

       श्रीमती निशा राय ने काव्य पाठ कि प्रस्तुति इस प्रकार की-

                              मधुर मुलायम रेशम -रेशम मखमल-मखमल जैसी है।

                              जन-जन के होठों पर बसती यह अमृत जल जैसी है।

       बरेली के हास्य कवि श्री पी.के. दीवाना ने चीन को चुनौती देते हुए कहा कि-

                              अबे ओ चीन, तू बड़ी-बड़ी बातें मत बोल,

                              बोलने से पहले अपनी छोटी-छोटी आंखे पूरी तरह से खोल।

                              मेरा दावा है कि हिंद के प्रति तेरी सारी गलतफहमियां धुल जाएंगी।

        कार्यक्रम का संचालन कर रहे कवि श्री राजेश राय ने कोरोना काल की परिस्थितियों पर व्यंग्य करते             हुए काव्य रचना प्रस्तुत की-

                              एक समय था बर्थ ली, बिस्तर बिछाया सो गए,

                              साथ यदि अच्छा मिला तो कल्पना में खो गए,

                              किन्तु चलना ट्रेन का, कोरोना में जब रूक गया,

                              देख खाली पटरियां कवि आनलाइन हो गये।

        झांसी के श्री देवेन्द्र नटखट ने राजभाषा हिंदी के प्रति सम्मान प्रकट इस प्रकार किया -

                              आभूषणों में कीमत ज्यादा बिंदी की होगी,

                              शहर में पहली दुकान सिंधी की होगी,

                              कोई लाख टांग खींचे मेरी मातृभाषा की,

                              हिंदोस्ता में हिमायत तो हिंदी की होगी।

       बरेली से श्री प्रभाकर मिश्र की रचना की पंक्तियां इस प्रकार रही-

                              दिल चुराने की फुरसत नहीं है, दिल लगाने की फुरसत नहीं है।

                              यू तो गहरी हैं सागर सी आंखे डूब जाने की फुरसत नहीं है।

 कवि सम्मेलन में स्वागत सम्बोधन श्री ओमकार नाथ सिंह, उप मुख्य राजभाषा अधिकारी ने किया। कवि सम्मेलन का संचालन राजभाषा अधिकारी श्री ध्रुव कुमार श्रीवास्तव ने किया एवं राजभाषा अधिकारी मो. अरशद मिर्जा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कवि सम्मेलन का आरम्भ वरिष्ठ अनुवादक श्रीमती अनामिका सिंह ने किया।