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ओजोन परत में हुए छेद से सहमे वैज्ञानिक, दोहारा सकती 36 करोड़ साल पहले की तबाही
June 28, 2020 • परिवर्तन चक्र

नई दिल्ली। वातावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए ओजोन परत (Ozone Layer) का ठीक रहना बेहद जरूरी है। इसी के जरिए रेडिएशन सीधे धरती तक नहीं पहुंच पाते हैं। मगर इसकी स्थिति लगातार खराब हो रही है। बीच में कोरोना काल के दौरान (Coronavirus Pandemic) इसके भरने की खबर आई थी, मगर अनलॉक 1.0 के साथ मुश्किलें दोबारा गहराने लगी हैं। वैज्ञानिकों ने ओजोन परत में छेद (Ozone Layer Depletion) को देखा है। ये तेजी से बड़ा हो रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि कहीं 36 करोड़ साल पहले जिस तरह से धरती से कई जीवों का खात्मा (Devastation) हो गया था, कहीं वहीं मंजर दोबारा न देखना पड़े।

नई दिल्ली। वातावरण के संतुलन को बनाए रखने के लिए ओजोन परत (Ozone Layer) का ठीक रहना बेहद जरूरी है। इसी के जरिए रेडिएशन सीधे धरती तक नहीं पहुंच पाते हैं। मगर इसकी स्थिति लगातार खराब हो रही है। बीच में कोरोना काल के दौरान (Coronavirus Pandemic) इसके भरने की खबर आई थी, मगर अनलॉक 1.0 के साथ मुश्किलें दोबारा गहराने लगी हैं। वैज्ञानिकों ने ओजोन परत में छेद (Ozone Layer Depletion) को देखा है। ये तेजी से बड़ा हो रहा है। विशेषज्ञों को डर है कि कहीं 36 करोड़ साल पहले जिस तरह से धरती से कई जीवों का खात्मा (Devastation) हो गया था, कहीं वहीं मंजर दोबारा न देखना पड़े।

वैज्ञानिकों ने स्थिति का जायजा लेने के लिए उस वक्त खराब हुए पौधों के डीएनए का अध्ययन किया। उसमें पता चला कि वो सूर्य की अल्ट्रावॉयलेट किरणों की वजह से ये जलकर खाक हुए हैं। ऐसा ओजोन परत में छेद की वजह से हुआ है। चूंकि ये लेयर सूर्य की हानिकारक किरणों से बचाती हैं, लेकिन परत में छेद होनी की वजह से किरणों की गर्मी सीधे धरती पर मौजूद चीजों को झुलसाने लगीं। हालांकि बाद में हिमयुग के बाद चीजें दोबारा नॉर्मल हो गई। मगर दुनिया में कई जगह मौसम में हो रहे लगातार बदलाव धरती के तापमान बढ़ने और ओजोन परत में दोबारा छेद होने के संकेत दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया तो पिछली बार की तरह भयंकर तबाही हो सकती है।