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नवदुर्गा की नौ दिव्य औषधियां
October 12, 2020 • परिवर्तन चक्र

मार्कण्डेय ऋषि द्वारा नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों का मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में उल्लेख उनकी अदभुत मेधा का परिचायक है। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य ब्रह्मा जी द्वारा उपदेशित ‘दुर्गा कवच’ में वर्णित है।

नवरात्र के दिव्य साधनाकाल में अपने अपने भक्तों की पूजा व आराधना से प्रसन्न होकर अपने नौ स्वरूपों के द्वारा न सिर्फ उनके संकट में उनका कल्याण करती हैं, अपितु उनको मानसिक जागृति व उत्तम स्वास्थ्य के अनुदान वरदान भी देती हैं। इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है मार्केंडेय पुराण में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों से सम्बद्ध अनुपम आयुर्वेदिक औषधियों का सविस्तार वर्णन। इस ग्रंथ के प्रणेता मार्कण्डेय ऋषि द्वारा नवदुर्गा के नौ औषधि स्वरूपों का मार्कण्डेय चिकित्सा पद्धति के रूप में उल्लेख उनकी अदभुत मेधा का परिचायक है। चिकित्सा प्रणाली का यह रहस्य ब्रह्मा जी द्वारा उपदेशित ‘दुर्गा कवच’ में वर्णित है।

1. शैलपुत्री से संबद्ध औषधि है हरड़

विभिन्न प्रकार के रोगों खासकर उदर रोगों में काम आने वाली वनस्पति ‘हरड़’ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री (हिमावती के नाम से भी विख्यात) का औषधि रूप मानी जाती है। यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है, जो सात प्रकार की होती है। इसमें हरीतिकी- भय को हरने वाली, पथया- हित करने वाली, कायस्थ- शरीर को बनाए रखने वाली, अमृता- अमृत के समान, हेमवती- हिमालय पर जन्मने वाली, चेतकी- चित्त को प्रसन्न करने वाली तथा श्रेयसी (शिवा व यशदाता)- कल्याण करने वाली है।

2. ब्रह्मचारिणी से संबद्ध औषधि है ब्राह्मी

नवदुर्गा के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी का औषधि रूप है ब्राह्मी। यह आयु और स्मरण शक्ति को बढ़ाने वाली, रूधिर विकारों का नाश करने वाली और स्वर को मधुर करने वाली औषधि है। इसलिए ब्राह्मी को सरस्वती भी कहा जाता है।

3. चंद्रघंटा से संबद्ध औषधि चंदसूर

नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा का औषधि रूप है चंदसूर। यह औषधि मोटापा दूर करने और हृदय रोग को ठीक करने वाली व शक्तिवर्धक भी मानी जाती है।

4. कुष्माण्डा से संबद्ध औषधि पेठा

नवदुर्गा के चौथे स्वरूप कुष्माण्डा का औषधि पेठा को कुम्हड़ा भी कहते हैं जो पुष्टिकारक, रक्त विकार को ठीक करने में सहायक है। मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति के लिए यह अमृत समान है।

5. स्कंदमाता से संबद्ध औषधि है अलसी

नवदुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता जिन्हें पार्वती एवं उमा के साथ स्कंद यानी कार्तिकेय की माता के नाम से भी जाना जाता है, का औषधि रूप अलसी है। यह वात, पित्त, कफ, रोगों की नाशक औषधि है।

6. कात्यायनी से सम्बद्ध औषधि है मोइया

नवदुर्गा का छठा स्वरूप कात्यायनी हैं जिनकी औषधि है मोइया। इसे आयुर्वेद में माचिका भी कहते हैं। यह कफ, पित्त, अधिक विकार एवं कंठ के रोग का नाश करती है।

7. कालरात्रि से सम्बद्ध औषधि है नागदौन

मां दुर्गा का सप्तम स्वरूप कालरात्रि है जो महायोगिनी तथा महायोगीश्वरी के नामों से भी जानी जाती है। नागदौन मां कालरात्रि का औषधि रूप है। यह औषधि सभी प्रकार के रोगों की नाशक एवं मन मस्तिष्क के समस्त विकारों को दूर करने वाली मानी जाती है।

8. महागौरी से संबद्ध औषधि है तुलसी

नवदुर्गा का अष्टम स्वरूप महागौरी है तथा मां महागौरी का औषधि रूप है तुलसी। प्रत्येक व्यक्ति इस पौधे के औषधीय गुणों से भलीभांति परिचित है। तुलसी सात प्रकार की होती है- सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरुता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र।

9. सिद्धिदात्री से सम्बद्ध औषधि है शतावरी

नवम स्वरूप सिद्धिदात्री का है जो नारायणी के नाम से भी जानी जाती हैं। मां सिद्धिदात्री का औषधि रूप शतावरी है। शतावरी बुद्धि बल के लिए उत्तम औषधि है। यह रक्त विकार एवं वात पित्त शोध नाशक और हृदय को बल देने वाली महाऔषधि है। इसके सेवन से रोगी के सभी शारीरिक सभी कष्ट सहज ही दूर हो जाते हैं।