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नई पद्वति के प्रयोग से डीजल पर निर्भरता कम होगी
July 15, 2020 • परिवर्तन चक्र

गोरखपुर 15 जुलाई, 2020:  पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन द्वारा लिये गये निर्णय के अनुसार एल.एच.बी. (लिंक हाफमैन बुस) रेकों के पिट अनुरक्षण के दौरान पावर कार के स्थान पर ट्रान्सफारमर का प्रयोग किया जायेगा। पावर कार के स्थान पर ट्रान्सफारमर का उपयोग बहुत ही लाभप्रद है। इस प्रणाली में व्यय में कमी के साथ ही डीजल का बहुत ही कम मात्रा में उपयोग होता है जिससे प्रदूषण से भी निजात मिलेगी। 

अभी तक एल.एच.बी. रेकों के पिट अनुरक्षण के दौरान दो पावर कार का प्रयोग होता है जिनमें चार डी.जी. सेट लगे होते हैं। एल.एच.बी. रेक के पिट अनुरक्षण का कार्य लगभग पाॅच घंटे तक चलता है जिसमें इस्तेमाल किये जाने वाले दो पावर कार में लगे कुल चार डी.जी.सेट में लगभग 400 लीटर हाई स्पीड डीजल (एच.एस.डी.) खर्च होता है जिसका अनुमानित लागत लगभग रू. तीस हजार है। साथ ही अनुरक्षण के दौरान डी.जी.सेटो से निकलने वाला कार्बन पर्यावरण के अनुकूल नहीं होता। 

एल.एच.बी. रेकों के पिट अनुरक्षण में ट्रान्सफारमर का प्रस्तावित प्रयोग शीघ्र ही आरम्भ हो जायेगा। 500 के.वी.ए. की क्षमता वाले ट्रान्सफारमर का प्रयोग होने से पिट अनुरक्षण के दौरान एच.एस.डी. की खपत नहीं होगी तथा इस दौरान कार्बन का उत्सर्जन न होने से यह प्रणाली पर्यावरण मित्रवत होगी। पहले जहां पावर कार के इस्तेमाल में चार व्यक्तियों की आवष्यकता होती थी वहां ट्रांसफारमर के उपयोग से दो व्यक्तियों की ही आवष्यकता पड़ेगी। इस नई पद्वति के प्रयोग से डीजल पर निर्भरता कम होगी जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।