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लखनऊ में फर्जी कंपनी बनाकर 59 करोड़ की ठगी, मास्टरमाइंड हरिओम फरार
September 16, 2020 • परिवर्तन चक्र • क्राइम न्यूज

पुलिस के मुताबिक ये लोग अपनी फर्जी कंपनी अलास्का रियल एस्टेट में पैसा निवेश करवाते थे और लोगों को आश्वासन देते थे कि उनकी कंपनी एशिया की टॉप-20 ट्रेडिंग करने वाली कंपनियों में एक है. निवेशकों को फायदे का लालच देकर पैसे लिए जाते थे.

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पुलिस ने फर्जी रियल एस्टेट कंपनी का पर्दाफाश किया है. इस मामले में आरोपियों ने करोड़ों रुपयों की ठगी को अंजाम दिया. वहीं पुलिस ने इस रैकेट से जुड़े 9 लोगों को गिरफ्तार किया है. साथ ही जांच में पता चला है कि इन लोगों के तार दुबई तक जुड़े हुए हैं.

राजधानी लखनऊ के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के अंतर्गत ये फर्जी कंपनी चल रही थी. लोगों से 59 करोड़ों रुपये की ठगी करने वाली कंपनी का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है. साथ ही पुलिस ने 9 लोगों को गिरफ्तार भी किया है. हालांकि फर्जी कंपनी बनाने वाला और नेटवर्क को फैलाने वाला मास्टरमाइंड हरिओम अभी भी पुलिस की गिरफ्त से फरार है. इसके अलावा अन्य पांच साथी भी पुलिस के हत्थे फिलहाल नहीं चढ़े हैं.

पुलिस के मुताबिक रियल एस्टेट के नाम पर फर्जी कंपनी चलाने वाले ठग लोगों से अपनी फर्जी कंपनी अलास्का रियल एस्टेट में पैसा निवेश करवाते थे और लोगों को आश्वासन देते थे कि उनकी कंपनी एशिया की टॉप-20 ट्रेडिंग करने वाली कंपनियों में एक है. हम लोग जो ट्रेडिंग करते हैं, उससे मिले प्रॉफिट के पैसों को लोगों तक पहुंचाते हैं और 5 फीसदी प्रतिमाह लाभांश ब्याज के तौर पर दिया जाएगा. हालांकि निवेश करवाने के कुछ ही महीनों बाद ये गिरोह ठगी कर लेता था.

लोगों को किया गुमराह इस मामले में पीड़ित प्रभाकर मिश्रा के जरिए बताया गया कि कंपनी के एजेंटों द्वारा लोगों को बताया गया कि कंपनी बहुत ही बड़ी है और देश के बाहर विदेश में भी ट्रेडिंग करती है. सात समुंदर पार दुबई में भी कंपनी ट्रेडिंग करती है और 20 फीसदी लाभांश हर माह कमाती है. इसके जो मालिक हरिओम यादव हैं वह दुबई के बुर्ज खलीफा के फ्लैट में रहते हैं और एशिया के टॉप 20 ट्रेडर्स में से एक हैं और वह हर महीने 20% लाभ कमाता है.

प्रभाकर मिश्रा ने बताया, 'कंपनी की इन बातों को सुनकर मैं झांसे में आ गया. मुझे विश्वास हो गया कि कंपनी सही है और मैंने पैसा निवेश कर दिया. मैं बेरोजगार था. हाईवे के पास हमारी जमीन थी, जिसको सरकार ने ले लिया था. हमें जो मुआवजा सरकार की तरफ से मिला था, वही पैसा मैंने कंपनी में लगा दिया. शुरुआती समय में इन लोगों ने कुछ दो-तीन महीने पैसे डबल करके दिए ताकि हमें विश्वास हो जाए. हमें विश्वास हो गया, जिसके कारण मैंने अपने रिश्तेदारों और मित्रों के भी पैसे इसमें निवेश करवा दिए. करीब एक करोड़ रुपये जानने वालों ने लगा दिए, अब सब पैसा डूब गया है.'

वहीं एक और पीड़ित ने बताया कि उसके कॉलोनी में रहने वाले तकरीबन 15 लोगों ने पैसा निवेश किया. जिनकी कुल रकम दो करोड़ रुपये के आसपास है. पैसा निवेश करने के तीन महीने बाद कंपनी वाले कंपनी बंद करके भाग गए. जब पता किया तो मालूम चला कि कंपनी का मुख्य डायरेक्टर हरिओम यादव देश में ही नहीं है. कंपनी के कुछ लोगों ने कहा कि जब वह आएंगे तभी पैसा मिलेगा.

दुबई तक नेटवर्क इस मामले में लखनऊ के डीसीपी साउथ रईस अख्तर ने बताया कि इनका धंधा यूपी के कई जिलों के साथ गुजरात के सूरत तक फैला हुआ था. यह लोग देश के बाहर दुबई तक अपना नेटवर्क फैलाए हुए थे. डीसीपी ने बताया कि अलास्का रियल एस्टेट कंपनी के डायरेक्टर और एजेंट ने मिलकर तकरीबन 59 करोड़ रुपए का लोगों से गबन किया है. इस कंपनी में तकरीबन साढ़े 500 सौ लोगों ने पैसा लगाया था. 

डीसीपी ने बताया कि हरिओम यादव के खिलाफ पहले भी लखनऊ के कृष्णानगर थाने में 5 करोड़ रुपये की ठगी करने का मुकदमा दर्ज है. उस प्रकरण में इसके कई साथी भी गिरफ्तार किए गए थे लेकिन इसने अपना काम बंद नहीं किया और गोसाईगंज में अलास्का रियल एस्टेट के नाम पर नई कंपनी बनाई और कई लोगों का पैसा गबन किया गया है.

डीसीपी ने बताया कि ठगी किए गए पैसों को उसने दुबई में भी निवेश किया है. जहां तक पता चला है, इसने दुबई के लोगों का भी पैसा गबन किया है. हालांकि पुलिस ने इस मामले में मुकदमा दर्ज कर मुखबिर की सूचना पर 9 लोगों की गिरफ्तारी की है. वहीं मुख्य आरोपी समेत 5 लोग फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है. पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है.

साभार-  आजतक