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क्या है बैरिया, बलिया में अकवन के पौधे की पत्तियों से बूंद-बूंद पानी टपकने का वैज्ञानिक कारण?
August 19, 2020 • परिवर्तन चक्र

बलिया निवासी वनस्पति विज्ञान के वैज्ञानिक एवं मदन मोहन मालवीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटपाररानी, देवरिया, उ० प्र० के अवकाश प्राप्त प्राचार्य डाॅ० ओम प्रकाश त्रिपाठी ने पर्यारवरणविद् डाॅ० गणेश पाठक से एक भेंटवार्ता में बताया कि बैरिया क्षेत्र में अकवन (मदार या आक या एकवन भी कहा जाता है) के पत्तों से बूंद- बूंद पानी टपकने का वैज्ञानिक कारण है।

डाॅ० त्रिपाठी ने बताया कि वास्तव में धरा पर जन्मे हुए सभी फल -फूल देने वाले वृक्ष/झाड़ियां/पौधे अपने जीवन यापन हेतु आवश्यक जल अपनी जड़ों के द्वारा जमीन से ही ऊपर की तरफ अवशोषित करतें हैं। यह जल उनके जड़ों से ऊपर तनों  के उच्चतम शिखर तक पत्तियों, फल व फूलों तक एवं उनके अंदर पाई जाने विभिन्न ऊत्तकों में एक जायिलम या नाली के द्वारा नीचे से ऊपर को सदैव प्रवाहित होती रहती है।पौधे के उपयोग से अधिक अवशोषित जल प्राय: पत्तियों के ऊपरी सतह पर नन्ही - नन्ही बूंदों के रूप में एकत्र होती रहती हैं। वहां पर वातावरण के तापक्रम के फलस्वरूप यह  जल वाष्पित होता रहता हैं। अधिक आयु के पौधे में जालियम की कोशिकाओं की आंतरिक गुहा (लुमेन) फैल जाती है। इससे पानी का अवशोषण और अधिक होने लगता है, फलस्वरूप पत्तियों पर उत्सर्जित जल की मात्रा बढ़ जाती है। यही जल धीरे-धीरे बूंदों के रूप में टपकने लगता है।

 पत्तियों से अधिक जल टपकने का भौगोलिक कारण भी है-

जब पर्यावरणविद् डाॅ० गणेश पाठक को बैरिया क्षेत्र के लोगों से यह पता चला कि उक्त एकवन के पौधे की पत्तियों सहित टहनियों से कई दिन से जल टपक रहा है तो इस संदर्भ में डाॅ० पाठक ने बताया कि वास्तव में यह पौधा मरू क्षेत्र एवं जल की कमी वाले स्थान पर पैदा व जीवनयापन के योग्य होता है। इसलिए इसमें जल अवशोषित करने की छमता अधिक विकसित होती है। चूंकि बैरिया क्षेत्र में एकवन की पत्तियों से टपकने की घटना मरूभूमि की नहीं है, बल्कि मैदानी भाग की है, अतएव यहां अकवन स्वभाव से अधिक जल अवशोषित कर रहा है। इसीलिए अधिक पानी की दिनों से इसके पत्तिओं से एवं टहनियों से टपक रहा है।