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कोरोना वायरस के विविध पक्ष एवं प्रभाव: डॉ० गणेश पाठक
August 27, 2020 • परिवर्तन चक्र


     
कोरोना वायरस ‘विषाणुओं‘ का एक ऐसा परिवार है, जिसके प्रभाव से अर्थात जिससे संक्रमित हो जाने से ‘फ्लू‘ जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं एवं साँस लेने में परेशानी होती है। वास्तव में कोरोना वायरस (120-160 NM) घिरे हुए RNA। वायरस होते हैं, जो कई प्रकार के होते हैं। वर्तमान समय में फैला कोरोना वायरस परिवार का सबसे नया सदस्य है, जो एक संक्रमित इंसान से दूसरे संक्रमित इंसान में फैलता है।

नामकरण-कोरोना वायरस के नामकरण की भी एक कहानी है। किसी भी वायरस में एक मध्य भाग होता है। इस मध्य भाग में जेनेटिक मैटेरियल भरा होता है, जबकि इसका एक वाह्य भाग भी होता है, जिसे कवच कहा जाता है। कोरोना वायरस का यह बाहरी खोल मुकुट की तरह दिखाई देता है और मुकुट (क्राउन) को लैटिन भाषा में ‘कोरोना‘ कहा जाता है। इसीलिए इसका नाम ‘कोरोना‘ पड़ा। कोरोना के कई रूपों की पहचान पहले भी की जा चुकी है। जैसे कि ‘सार्स‘ (सिवियर एक्युट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) कोरोना वायरस, जिसकी पहचान 2003 में की गयी थी। जिस समय दिस्म्बर, 2019 में चीन में यह वायरस अस्तित्व में आया, एक नया प्रकार का कोरोना वायरस होने के कारण प्रारम्भ में इसे ‘नोबल कोरोना वायरस 2019‘ (nCow- 2019) नाम दिया गया। यह नाम अस्थायी था। बाद में इस वायरस की सार्स वायरस से समानता को देखते हुए ‘द कोरोना वायरस स्टडी ग्रुप आँफ इंटरनेशनल कमेटी आन टेक्नोलॉजी‘ ने इसका नाम ‘सार्स-कोव-2‘ रखा। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा इसका नाम ‘कोविड-19‘ रखा गया। जिसमें ‘को‘ का अर्थ कोरोना, ‘वि‘ का अर्थ वायरस एवं ‘डी‘ का अर्थ डीजीज (COVID-19) है। चीन से उत्पन्न होने के कारण इसे चीनी वायरस एवं वुहान नगर से उत्पन्न होने के कारण इसे वुहान वायरस भी कहा जाता है। किं तु ये दोनों अधिकारिक नाम नहीं हैं।

कैसे फैलता है संक्रमण एवं क्या है लक्षण-विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार सार्स कोरोना वायरस चमगादड़ से  सिवेट कैट में फैला, फिर इससे मानव में फैला, जिसका पहला संक्रमण दक्षिणी चीन के गुआनडोंग में सन् 2002 में सामने आया था, जिसके लक्षण इन्फ्लूएंजा जैसे ही थे। कोरोना वायरस का एक अन्य रूप एम. ई. आर. एस. भी है, जिसे मर्स (MERS) भी कहा जाता है। मर्स से तात्पर्य ‘मिडल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस‘ है, जो मनुष्य से ऊँट में प्रसारित हुआ। काँमन कोल्ड के लिए कोरोना वायरस ही जिम्मेदार होता है। यहाँ तक कोविड-19 वायरस की बात है तो प्रथम द्रष्टया यह माना गया कि यह वायरस जानवर से मानव में संक्रमित हुआ, किंतु बाद मे स्पष्ट हुआ कि यह मानव से मानव में तेजी से फैल रहा है। यद्यपि कि कोरोना वायरस पशुआओं में पाया जाता है और पशु से मनुष्य में फैलने वाला यह सातवाँ वायरस है। इस तरह कोरोना वायरस फैलने के तीन कारण स्पष्ट हैं- 1. इंसानों सू जानवरों के संपर्क में आने से, 2. मनुष्य से मनुष्य में मनुष्य के खाँसने, छिंकने या हाथ मिलाने से, 3.पशु के खाँसने, छिंकने या संपर्क में आने से।

कोरोना वायरस के कारण ‘रेस्पिरेटरी ट्रेक्ट‘ अर्थात श्वसन तंत्र में हल्का इंसफेक्सन हो जाता है। जो साधारणतया सर्दी-जुकाम की तरह ही होता है। इसके बाद नाक से पानी गिरना, तेज सिर दर्द, सूखी खाँसी, गले में ठरास एवं दर्द, तेज बुखार, थकान, उल्टी महसूस होना एवं साँस लेने में कठिनाई होना मुख्य लक्षण है। कोरोना वायरस का संक्रमण संक्रमित व्यक्ति से निकलने वाले तरल पदार्थ जैसे-लार, बलगम या छिंक के दौरान निकलने वाली छोटी-छोटी बूँदें जब हवाहया आस-पास के सतहों पर फैल जाती है और कोई अन्य व्यक्ति इन संक्रमित सतहों को छूकर अपने नाक, आँख सहित चेहरे को छूता है तो उस व्यक्ति में कोरोना वायरस का संक्रणण फैल जाता है। कोरोना वायरस के अधिक संक्रमण से किडनी एवं लीवर भी खराब हो जाते हैं और संक्रमण की स्थिति खराब होने पर रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। संक्रमण के लक्षण खासतौर से 14 दिन बाद या 27 दिन बाद प्रकट होते हैं।

विश्व एवं भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण की स्थिति-कोरोना वायरस पूरे विश्व में अपने संक्रमण से तहलका मचाए हुए है। विकसित, विकासशील एवं अविकसित में से कोई भी देश इसके प्रभाव से बचा नहीं है। कोरोना वायरस अब तक विश्व के 195 से भी अधिक देशों को अपनी चपेट में ले चुका है एवं एक महामारी के रूप में भीषण आपदा का रूप ग्रहण कर लिया है। भारत की स्थिति भी दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है और संक्रमण रूकने का नाम नहीं ले रहा है। विभिन्न प्रभाव-कोरोना वायरस के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रभाव देखने को मिल रहा है। जो इस प्रकार है- 

पर्यावरण के लिए बना संजीवनी-कोरोना से बचाव हेतु विश्व भर जो लाँकडाउन की प्रक्रिया अपनायी गयी उस दौरान मानव की सभी सामाजिक, आर्थिक, उत्पादन संबंधित, परिवहन आदि गतिविधियां बंद हो गयी और लोग घरों में दुबक कर रहने लगे। नतीजा यह हुआ कि पर्यावरण के सभी पक्षों का स्वतंत्र रूप से विकास हुआ। उनको हानि पहुँचाने वाली विषैली गैसों के न निकलने से कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ा। यहां तकक्षकि जल प्रदूषण, वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण बिल्कुल कम हो गया। कार्बन गैसों के उत्सर्जन न होने से वायुमंडल बिल्कुल स्वच्छ रहा। तापवृद्धि भी कम हुई। नदियों का जल भी स्वच्छ हो गया। इस तरह सम्पूर्ण पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी के लिए लाँकडाउन ने संजीवनी का काम किया। इससे यह जरूर संदेश मिला है कि यदि हमें पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखना है एवं बचाए रखना है तो कोरोना काल के बाद भी लाँकडाउन की प्रक्रिया अपनानी होगी।

आर्थिक प्रभाव-कोरोना काल में लाँकडाउन की प्रक्रिया अपनाने से न केवल भारत की बल्कि पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था ठप पड़ गयी। उत्पादन बंद हो गया। सारी आर्थिक गतिविधियां बंद हो गयी। नतीजा यह हुआ कि पूरा विश्व आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है और सारे विश्व की आर्थिक गतिविधियों में ठहराव आ गया है। रोजगार के अवसर समाप्त हो जाने से विकट समस्या उत्पन्न होती जा रही है।

सामाजिक प्रभाव-पूरे विश्व में कोरोना वायरस से बचाव हेतु लाँकडाउन की जो प्रक्रिया अपनायी गयी और आइशोलेशन तथा क्वारंटाइन जैसे बचाव के जो तरीके अपनाए गये, उससे व्यक्ति से व्यक्ति, परिवार से परिवार एवं समुदाय से समुदाय के मध्य दूरियाँ बढ़ गयीं। लोग एक दूसरे से मिलने से कतराने लगे। प्रत्येक व्यक्ति एक दूसरे को संक्रमण की दृष्टि से ससंकित नजरों से देखने लगा और आश्चर्य तो तब हुआ जब किसी परिवार में किसी के संक्रमित हो जाने पर परिवार के अन्य लोग भी उससे दूरी बना लेते थे। माँ बेटे से, बाप बेटे से, भाई भाई से दूरियाँ बढ़ा लेता था। सारे संबंध धरे के धरे रह जाते थे।

राजनीतिक प्रभाव-कोरोना-19 वैश्विक महामारी आपदा ने राजनीति एवं कूटनीति को भी नहीं छोड़ा। कोरोना की उत्पत्ति एवं प्रसार को लेकर अमेरिका एवं चीन में एक तरह से शीत युद्ध छिड़ गया है। भारत एवं चीन के रिश्तो एवं भारत नेपाल के रिश्तों में भी खटास आ गयी है। पूरा विश्व दो खेमों में बँट गया है। विश्व स्तर पर राजनैतिक उथल-पुथल जारी है।

विविध शोध अध्ययन भी सामने आए-कोरोना वायरस की उत्पत्ति से लेकर उसके बदलते रूप, प्रभाव, हानि-लाभ, संक्रमण, चिकित्सा पद्धति, वैक्सीन की खोज, दवाओं के प्रयोग एवं भावी परिदृश्य को लेकर विश्व स्तर पर अनेकों शोध अध्ययन किए गए एवं अभी शोध जारी हैं। अनेक तरह की घोषणाएँ भी की गयी हैं। जैसे यह भी कहा जा रहा है कि कोरोना दिसम्बर 2020 के बाद कमजोर हो जायेगा। कुछ शोध में बताया गया है कि इसका प्रभाव दो वर्षों तक रहेगा और यह भी कहा जा रहा है कि यह बीमारी स्वतः कमजोर होकर अन्य संक्रमित होने वाली बीमारियों की तरह बनी रहेगी।

कैसे करें कोरोना से बचाव-वैसे अब तक विशेषज्ञों द्वारा, चिकित्सकों द्वारा, स्वास्थ्य विभाग द्वारा, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा एवं अनुभवीं लोगों द्वारा कोरोना से बचाव हेतु सारे उपाय बताए जा चुके हैं, जिसकों हम सभी जानते भी हैं। फिर हम यहाँ पर पुनः उन्हीं बातों को दोहरा रहे हैं कि कोरोना के संक्रमण से बचाव ही इससे बचने का एकमात्र उपाय है और उसके लिए आवश्यक है कि जब आवश्यक हो तभी घर से निकलें ओर बिना मास्क लगाएँ न निकलें। बल्कि मास्क को अपनी दिनचर्या का अंग बना लें। पानी गुनगुना पिएँ। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, काढ़ा अवश्य पिएँ और नियमित व्यायाम एवं योगा भी अवश्य करें। जरा भी शंका हो तो टेस्ट अवश्य कराएँ। कभी भी टेस्ट कराने से हिचके नहीं। इम्यूनिटी बढ़ाने वाले शाकाहारी भोजन करें, आत्मबल बनाएँ रखें, स्वस्थ रहें-मस्त रहें, कोरोना भगाए रखें।