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खुलासा : चीन ने एक महीने पहले ही अपने लोगों को दे दी थी कोरोना की वैक्सीन
August 26, 2020 • परिवर्तन चक्र

चीन ने अचानक से पूरी दुनिया को चौंका दिया है. चीन ने अपने लोगों को कोरोना की वैक्सीन दे दी है. ये दावा किया है अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने. अखबार की खबर के मुताबिक चीन लोगों पर प्रयोगात्‍मक तौर पर कोरोना वैक्‍सीन का इस्‍तेमाल करने वाला पहला देश है.

अमेरिकी अखबार की खबर के मुताबिक चीन ने जुलाई के अंत में इस वैक्सीन को हाई रिस्क ग्रुप्स में आने वाले लोगों के बीच उपयोग किया है. अगर इस दावे को सच मान लिया जाए तो चीन ने रूस से तीन हफ्ते पहले ही वैक्सीन को अपने लोगों के बीच उतार दिया है.

रूस और चीन की वैक्सीन में समानता ये है कि दोनों ही वैक्‍सीन ने क्‍लीनिकल ट्रायल के मानकों (clinical trials) को पार नहीं किया है. बीजिंग के स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि उन्‍होंने कुछ मेडिकल वर्कर्स और सरकारी उद्यमों से जुड़े कर्मचारियों पर जुलाई माह के आखिर में आपातकालीन प्रयोग के तहत वैक्‍सीन की खुराक दी थी.

इस समय जब पूरी दुनिया कोरोना वैक्सीन को लेकर चर्चा चल रही है. बाजार में लाने, वैक्सीन विकास को लेकर, उसके ट्रायल को लेकर आए दिन विवाद हो रहे हैं. इसलिए कई देश इस प्रोटोकॉ़ल को छिपा कर अपनी वैक्सीन को दुनिया के सामने लाना चाहते हैं.

बीजिंग की ओर से यह घोषणा पिछले सप्‍ताह के एक कूटनीतिक विवाद के बाद सामने आई है, जिसमें पापुआ न्‍यू गिनी ने कहा था कि उसने चीन के उन खानकर्मियों को वापस लौटा दिया था जिन्‍होंने यह प्रयोगात्‍मक कोरोना वायरस वैक्‍सीन ली थी.

कोरोना के वैक्सीन को लेकर चीन के इस दावे के बाद अमेरिका समेत कई देशों में काफी बेचैनी है. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने ट्वीट कर आरोप लगाया कि अमेरिका का फूड एंड ड्रग्‍स एडमिनिस्‍ट्रेशन (FDA) बिना कोई जानकारी दिए कोरोना वैक्‍सीन को विकसित करने में देरी कर रहा है.

रूस ने 11 अगस्त को दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन बना लेने की घोषणा की थी. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा थ कि उनके देश ने कोरोना वायरस की पहली वैक्सीन बना ली है. उन्होंने यह भी बताया कि उनकी बेटी को भी यह टीका लगाया गया है. वह अच्छा महसूस कर रही है.

रूस का दावा है कि इस टीके से Covid-19 के खिलाफ स्थाय़ी इम्यूनिटी विकसित की जा सकती है. हालांकि, रूस के क्लीनिकल ट्रायल संघ के प्रमुख ने इस वैक्‍सीन का रजिस्ट्रेशन नहीं करने को कहा है. क्लीनिकल ट्रायल आम तौर पर हज़ारों लोगों पर होता है जबकि रूस की वैक्सीन का ट्रायल 100 से भी कम लोगों पर हुआ है.