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हिन्दी दिवस के अवसर पर संकल्प लें कि सरकारी कामकाज में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करेंगे : ललित चंद्र त्रिवेदी
September 14, 2020 • परिवर्तन चक्र

गोरखपुर 14 सितम्बर, 2020:  पूर्वोत्तर रेलवे राजभाषा विभाग के तत्त्वावधान में राजभाषा सप्ताह समारोह-2020 के अन्तर्गत महाप्रबन्धक, पूर्वोत्तर रेलवे श्री ललित चंद्र त्रिवेदी की अध्यक्षता में क्षेत्रीय रेलवे राजभाषा कार्यान्वयन समिति का ई-बैठक का आयोजन वर्चुअल रूप में किया गया। 

बैठक को सम्बोधित करते हुए महाप्रबन्धक, पूर्वोत्तर रेलवे श्री ललित चंद्र त्रिवेदी ने हिन्दी दिवस पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत की संविधान सभा ने 14 सितम्बर,  1949 को हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था। तब से इस दिन को हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत के संविधान में हिन्दी को लागू करने के संबंध में जो कल्पना की गई है उसे साकार करने के लिये सभी को अपने कार्य क्षेत्रों में ईमानदार प्रयास करते हुए हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करने की आवष्यकता है। हम सभी का संवैधानिक कर्तव्य है कि हिन्दी के विकास एवं समृद्वि में अपना सक्रिय योगदान दें। अब सभी कार्य ई-आफिस के माध्यम से ही किया जाना है। ई-आफिस में भी हिन्दी में कार्य करने की क्षमता उपलब्ध है। आवष्यकता है कि कर्मचारी ई-आफिस में भी हिन्दी में कार्य करने हेतु पूरी तरह से अपने मन के झिझक को दूर करते हुए पूरे मनोयोग से इसे सीखे और अमल में लाएं।  हिन्दी ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में भी राष्ट्रीय चेतना को जागृत करने में अहम योगदान दिया था। आज भी यह देश की एकता, अखंडता एवं प्रगति को कायम रखने के लिये अत्यन्त आवष्यक है। आजकल हमारा युवा वर्ग निरन्तर वेबसाइटों के माध्यम से नई-नई जानकारियां प्राप्त करते हुए अपने अभिनव प्रयोग की दिशा में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि रेल कार्यालयों में आम जनता से संबंधित सभी सामग्रियां/सूचनाएं वेबसाइटों पर अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दीं में भी उपलब्ध करायी जाएं। 

महाप्रबन्धक ने कहा कि हिन्दी दिवस के शुभ अवसर पर इस बैठक में सभी संकल्प लें कि अपने सरकारी कामकाज में हिन्दी का अधिकाधिक प्रयोग करके भारतीय संविधान के प्रति अपनी निष्ठा एवं समर्पण भावना का परिचय देंगे।

गृहमंत्री, भारत सरकार का संदेश वाचन मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय ने किया। जिसमें गृहमंत्री ने सभी को हिन्दी दिवस पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में आज भारत एक संसाधन सम्पन्न शक्तिषाली देश के रूप में उभर रहा है और इसमें देष की समृद्व भाषा हिन्दी का बहुत बड़ा योगदान है। वैष्विक मंचों पर प्रधानमंत्री जी द्वारा हिन्दी में दिए गए भाषणों से हिन्दी का वैष्विक कद मजबूत हुआ है और हिन्दी पे्रमियों को प्रेरणा भी मिल रही है। इससे देश की युवा पीढ़ी भाषा के साथ जुड़ने की ओर अग्रसर हुई है। कई प्रकार की संस्कृतियां, कई प्रकार की कलाएं और कई प्रकार की भाषाओं का मेलजोल हमारे देष में दिखायी पड़ता है। यह हमारी बहुत बड़ी ताकत है। अनेक भाषाएं एवं संस्कृतियां हमारी न केवल विरासत है] हमारी ताकत भी है। संस्कृति व भाषाई विविधता से भरे इस गौरवषाली देष में पूरब से पष्चिम और उत्तर से दक्षिण के बीच सदियों से कई भाषाओं ने सम्पर्क बनाए रखने का काम किया है। हिन्दी ने भारत को एकता के सूत्र में पिरोने का काम किया है। हिन्दी भाषा और बाकी सारी भारतीय भाषाओं ने मिलकर भारत की सांस्कृतिक विविधता को आगे ले जाने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। हिन्दी की सर्वग्राहयता को ध्यान में रखते हुए भारतीय संविधान सभा ने 14 सितम्बर, 1949 को हिन्दी को संघ की राजभाषा के रूप में अंगीकार किया।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने के लिये आवष्यक है कि सरकारी कामकाज अनुवाद की अपेक्षा मूल रूप से हिन्दी में किया जाए और अन्य स्थानीय भाषाओं में इसका अनुवाद किया जाए। 

इस अवसर पर मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय ने स्वागत संबोधन किया। 

उप मुख्य राजभाषा अधिकारी ओमकार सिंह ने रेल, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल का संदेष वाचन किया। अपने संदेष में श्री गोयल ने हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हिन्दी दिवस भारतीय संस्कृति की अनेकता में एकता का प्रतीक है और सभी भारतीय भाषाओं के आपसी सौहार्द का दिवस भी है। किसी भी राष्ट्र, समाज और सभ्यता की पहचान उसकी अपनी भाषा से होती है। भाषा केवल संवाद की ही नहीं अपितु संस्कृति और संस्कारों की संवाहक भी होती है। कोविड-19 जैसी वैष्विक महामारी के इस दौर में, पूरे विष्व ने भारतीय संस्कृति का अनुसरण करते हुए ’नमस्ते को अभिवादन के तौर पर प्रयोग करना शुरू कर दिया है जो भारतीय के लिये अत्यन्त गौरव की बात है। भारत की संस्कृति और भाषाओं की महत्ता को सारा विष्व स्वीकार कर रहा है। हिन्दी दिवस के इस अवसर पर उन्होंने सभी रेल अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील किया कि वे पूरे उत्साह से अपना सरकारी काम-काज यथासंभव हिन्दी में ही करने का प्रयास करें। बैठक में उप मुख्य राजभाषा अधिकारी ने आभार प्रदर्षन किया।

बैठक में पिछली बैठक के कार्यवृत्त की पुष्टि  की गयी। कार्यवृत्त के प्रमुख निर्णयों के अनुपालन में स्थिति की समीक्षा की गयी तथा रेलवे बोर्ड की संसोधित मानक कार्यसूची के अनुसार राजभाषा अधिकारी श्री ध्रुव कुमार श्रीवास्तव ने चर्चा की। समिति के अन्य सदस्यों के विचार सुझाव मांगे गये।

राजभाषा सप्ताह समारोह-2020 को दूसरे दिन 15 सितम्बर, 2020 को मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में हिन्दी की संवैधानिक व्यवस्थाओं पर कार्यषाला का आयोजन किया जायेगा जिसमें निदेशक, राजभाषा, रेलवे बोर्ड डा. वरूण कुमार अपना वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।