ALL क्राइम न्यूज स्वास्थ्य घरेलू नुस्खे उत्तर प्रदेश अध्यात्म कोरोना वायरस देश बलिया समाचार दुष्कर्म मनोरंजन
हारेगा कोरोना : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से आ रही कोरोना वैक्सीन को लेकर अच्छी खबर, आप भी जानें…
July 20, 2020 • परिवर्तन चक्र

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के प्रसार के साथ पूरी दुनिया कोरोना वैक्सीन को बनाने में जुटी है। दुनिया के 140 कैंडिडेट वैक्सीन पर रिसर्च किया जा रहा है। दुनियाभर में लोगों को सबसे ज्यादा आशा इसको लेकर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से है। यहां चल रहे कोरोना वैक्सीन के मानव ट्रायल से सबसे अधिक उम्मीदें हैं।

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने AZD1222 नाम की एक कोरोना वैक्सीन बनाई है, जिसे कोरोना महामारी को रोकने के लिए काफी कारगर माना जा रहा है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि यह वैक्सीन कोरोनावायरस के खिलाफ जरूर काम करेगी।

शोधकर्ताओं के मुताबिक फिलहाल इस वैक्सीन का मानव ट्रायल चल रहा है। शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों की टीम ने पता लगाया है कि इंसानों पर शुरुआती चरण के परीक्षण के बाद कोरोना के खिलाफ यह टीका दोहरी सुरक्षा प्रदान कर रहा है और यह बेहद सुरक्षित भी है। शोध में पता चला कि वैक्सीन ने ट्रायल में इंसानी शरीर को एंटीबॉडी और मारने वाला टी-सेल दोनों बनाने में कामयाबी हासिल की है।

अब ऐसी रिपोर्ट आई है कि इस वैक्सीन के मानव परीक्षण के अब तक के नतीजे काफी सकारात्मक रहे हैं। यह वैक्सीन कोरोनावायरस से लड़ने के लिए इंसान के इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र को प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग देती है और यही एक वैक्सीन का प्रमुख काम होता है।

यूके स्थित मेडिकल जर्नल द लांसेट के प्रधान संपादक का कहना है कि यह सुरक्षित, अच्छी तरह से सहनशील और प्रतिरक्षात्मक है। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा विकसित एक कोरोना वायरस वैक्सीन सुरक्षित दिखाई देता है और प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रशिक्षित करता है।

1,077 लोगों को शामिल करने वाले परीक्षणों से पता चला कि इंजेक्शन से उन्हें एंटीबॉडी और श्वेत रक्त कोशिकाएं मिलीं जो कोरोनो वायरस से लड़ सकती हैं। वैक्‍सीन को लेकर निष्कर्ष बेहद आशाजनक हैं, लेकिन अभी भी यह जानना जल्द ही संभव है कि क्या यह सुरक्षा प्रदान करने के लिए पर्याप्त है और बड़े परीक्षण चल रहे हैं।

ब्रिटेन ने पूर्व में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा परीक्षण किए जा रहे टीके की 10 करोड़ खुराक हासिल करने के लिए एस्ट्राजेनेका से समझौता किया था। सरकार ने इस दवा की खोज में मदद के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के साथ ही साथ इंपेरियल कॉलेज लंदन को करोड़ रुपये की मदद भी दी है। इनकी वैक्सीन का जून में ही इंसानों पर परीक्षण शुरू हुआ था। पहले चरण में नतीजे कारगर मिले हैं।