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गांवों वालों सतर्क हो जाओ, ग्राम समाज की जमीन पर अगर किया है कब्जा तो खैर नहीं
July 9, 2020 • परिवर्तन चक्र

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 75 जिलों में कुल 97607 गांव हैं। इन गांवों में रहने वाले वह ग्रामीण अब सतर्क हो जाएं, जो ग्राम समाज की जमीन का प्रयोग अपनी पुश्तैनी जमीन की तरह कर रहे हैं। अब उनको इस कब्जे को भलमानसहत से छोड़ना पड़ेगा। गांवों की प्रॉपर्टी का लेखाजोखा करने के लिए 'स्वामित्व योजना' शुरू की गई। इसमें प्रत्येक व्यक्ति की सम्पत्ति की ड्रोन के जरिए मैपिंग की जाएगी। मैपिंग बाद ही भूमि स्वामित्व का प्रमाणपत्र दिया जाएगा। और इस प्रमाणपत्र के आधार पर यह पता चल जाएगा कि कौन सी जमीन आपकी है और कौन सी ग्राम समाज की। भूमि का प्रमाण पत्र मिलने के बाद अपने मकान में आबादी भूखंड पर बैंक ऋण भी ले सकेंगे। जिला बाराबंकी में पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो चुका है। प्रदेश सरकार ने पहले चरण में 54022 गांव को स्वामित्व योजना में शामिल किया है। देश में अभी यह योजना उत्तर प्रदेश सहित छह राज्यों में चल रही है। इस योजना का मकसद ग्रामीण भारत को अपग्रेड करना है।

उत्तर प्रदेश के लगभग सभी गांवों का एक ही हाल है कि कागज में अभी सार्वजनिक भूखंड व तालाब उपलब्ध है पर जब जांचा जाता है तो वह गायब हो जाता है। स्वामित्व योजना से ग्राम समाज के भीतर सरकारी भूखंड पर ऐसे कब्जों की पोल खुलने जा रही है। राजस्व विभाग के एक अफसर ने बताया कि आबादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण ड्रोन तकनीक से होगा। जिला स्तर पर डीएम के अलावा राजस्व परिषद व शासन स्तर पर नियमित रूप से इसकी प्रगति की निगरानी की जाएगी।

'स्वामित्व योजना' के फायदे :-

1. अपने क्षेत्राधिकार में संपत्ति धारण करने वालों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध होगी।

2. प्रत्येक संपत्ति की सीमा में क्षेत्रफल सुनिश्चित होने से निजी संपत्ति के विवाद कम होंगे।

3. प्रत्येक संपत्ति धारक की संपत्ति का प्रमाण पत्र भूमि स्वामित्व प्राप्त होगा।

4. सार्वजनिक उपयोग की संपत्ति का स्थानीय लोग सामान तरीके से उपयोग कर सकेंगे