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दीया-बाती प्रदर्शनी : चकाचौंध को पीछे छोड़ फ्रंट सीट पर आने को आतुर दिखी हस्तकला
November 9, 2020 • परिवर्तन चक्र • बलिया समाचार

आकांक्षा ​समिति की अध्यक्ष पूनम शाही ने आफिसर्स क्लब में प्रदर्शनी का किया शुभारम्भ

ग्रामीण हस्तशिल्प कला से निर्मित एक से बढ़कर एक सामान बने हैं आकर्षण का केंद्र

बलिया: त्योहार पर पुरानी परम्परा को जीवंत रखने व हस्तशिल्प से जुड़ी वस्तुओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आफिसर्स क्लब में दीया-बाती प्रदर्शनी लगाई गई। 13 नवम्बर तक चलने वाली इस प्रदर्शनी का शुभारम्भ आकांक्षा समिति की अध्यक्षा पूनम ​शाही ने किया। इस प्रदर्शनी में स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की गयी तरह-तरह की घरेलू सामग्रियों का स्टॉल भी लगाया, जिसकी खरीद वहां मौजूद लोगों ने बड़े उत्साह से किया।

अपने सम्बोधन में श्रीमती शाही ने कहा कि प्रकृति हमें समय-समय पर सचेत करती है कि अब संभल जाएं। कोरोना का कहर इसका ताजा उदाहरण है। आज यह जरूरी हो गया है कि हम अपनी पुरानी परम्पराओं को लेकर चलें। हम सब संकल्प लें कि इस बार दीवाली त्योहार को परम्परागत व मूल स्वरूप में ही मनाएं। कहते हैं कि एक व्यक्ति से परिवार, परिवार से समाज व समाज से एक देश का निर्माण होता है। इसलिए हर कोई स्वयं के स्तर से शुरूआत करें। कार्यक्रम में आकांक्षा समिति की सदस्या शीला यादव व सीमा यादव ने भी अच्छाई की जीत के उत्साह वाले इस त्योहार पर मिट्टी के दिए जलाने का आवाह्न किया। कार्यक्रम में मिशन शक्ति अभियान के तहत हस्ताक्षर अभियान चलाया गया,​ जिसमे जिलाधिकारी समेत अन्य अतिथियों ने प्रतिभाग किया। इसका उद्देश्य महिला सुरक्षा व बालिका शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक​ करना था। इस अवसर पर सीडीओ विपिन जैन, एसडीएम सदर राजेश यादव, डिप्टी कलेक्टर सीमा पाण्डेय व सर्वेश यादव, बीएसए शिवनारायण सिंह, उपायुक्त उद्योग राजीव पाठक समेत अन्य अधिकारी व आम लोग मौजूद थे।

मूल परम्पराओं को बनाए रखने से होगा प्रकृति-पर्यावरण का संरक्षण

दीया-बाती प्रदर्शनी में जिलाधिकारी एसपी शाही ने कहा कि प्रकृति व पर्यावरण के संरक्षण संग ग्रामीण स्तर की हस्तशिल्प से जुड़ी वस्तुओं के प्रति प्रोत्साहित करना इस प्रदर्शनी का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता, उससे प्रेम से जुड़े संदेश को हम भूलते जा रहे हैं। आधुनिकता व भौतिकवाद के दौर में अपने पर्व को परम्परागत व मौलिक रूप नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन, त्योहार में सर्व समाज का जो उत्साह, आनन्द व समन्वय समाहित है, उसको बनाए रखने की जरूरत है। मूल परम्पराओं को बनाए रखने से प्रकृति व पर्यावरण का संरक्षण होगा। साथ ही हमारी हस्तशिल्प कला भी जीवंत बनी रहेगी। एक कुम्हार का हाथ चलता है तो किस तरह मिट्टी का रूप बदलता है, अब सबको उस कला व रूप का सम्मान करना होगा।

वर्तमान व भविष्य की पीढ़ी को होना होगा जागरूक

जिलाधिकारी श्री शाही ने कहा कि मिट्टी का दीया प्रकृति के पांचों तत्वों का द्योतक है। इन्हीं पंचतत्वों से निकलने वाला जो प्रकाश है, वह हम सबके जीवन में पैदा हो। मिट्टी का दीया यह संदेश देता है हम मिट्टी में ही पैदा हुए और मिट्टी में ही मिलेंगे। इसलिए उस मिट्टी का सम्मान, समर्पण व संवेदनशीलता बनाए रखना इस प्रदर्शनी का आशय है। इसकी परिकल्पना शत प्रतिशत पूरी तभी होगी, जब जन—जन और आने वाली पीढ़ी के अंदर भी इन सबके प्रति जागरूकता आएगी। वर्तमान व भविष्य की पीढ़ी को जागरूक होना होगा। उन्होंने कहा कि छठ पर्व प्रकृति का पर्व है। तमाम आधुनिकता व भौतिकवाद के बाद भी काफी हद तक यह अपने मूल स्वरूप में है। उसमें ग्रामीण हस्तशिल्पी व ग्रामीण मौलिकता बनी हुई है।

नाटक के जरिए बताया मिट्टी के दियों का महत्व

प्रदर्शनी में आशीष त्रिवेदी के नेतृत्व में संकल्प संस्था द्वारा प्रस्तुत नाटक भी बेहद खास रहा। कलाकारों ने दीया-बाती नाटक की शानदार प्रस्तुति दी। नाटक के जरिए संदेश दिया कि मिट्टी के दिए का जुड़ाव हमरी संस्कृति व सभ्यता से है, लिहाजा हमें दीवाली में मिट्टी के दिए ही जलाने चाहिए। नाटक में आनंद चौहान, अर्जुन, सोनी, ट्विंकल गुप्ता, वैभव, अमन, रोहित, अखिलेश का अभिनय शानदार रहा। जिलाधिकारी, एएसपी संजय कुमार ने कलाकारों की पीठ थपथपाकर उनकी हौसलाआ​फजाई की।

सैंड आर्टिस्ट की कलाकृति को सबने सराहा

दीया—बाती प्रदर्शनी में सैंड आर्टिस्ट रूपेश सिंह ने आफिसर्स क्लब परिसर में शानदार कलाकृति बनाई थी। इसको जिलाधिकारी एसपी शाही, आकांक्षा समिति की अध्यक्षा पूनम शाही, सदस्या शिला यादव, सीमा यादव, डिप्टी कलेक्टर सीमा पाण्डेय समेत वहां मौजूद अधिकारियों व आम लोगों ने देखा। देखने के बाद हर कोई इसकी सराहना कर रहा था। कलाकृति में एक तरह गणेश जी की मूर्ति तथा बेटी बचाओ अभियान प्रदर्शित था, तो वहीं दूसरी तरफ मिटृटी के दिए जलाने के प्रति प्रेरित करने वाला संदेश था। जिलाधिकारी ने भी विशेष तौर पर आर्टिस्ट रूपेश सिंह को इसके लिए बधाई शुभकामनाएं दी। 

हस्तशिल्प से निर्मित चीजें थी आकर्षण का केंद्र

दीया-बाती प्रदर्शनी में बेसिक शिक्षा​ विभाग, महिला कल्याण विभाग, पेंशन व छात्रवृत्ति से जुड़े विभागों संग दर्जन भर विभागों ने स्टॉल लगाकर विभागीय योजनाओं की जानकारी साझा किया। वहां जाने वाले लोगों को सरकार की योजनाओं व उसका लाभ कैसे लें, इसके बारे में बताया। बच्चों के लिए लर्निंग मैटेरियल से जुड़ी चीजों की बेसि​क शिक्षा विभाग की प्रदर्शनी भी बेहद खास बनी रही। आकांक्षा समिति की अध्यक्ष पूनम शाही, सदस्या ​शिला यादव, सीमा यादव व अन्य अतिथियों ने सभी स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान हस्तशिल्प से निर्मित जैसे गाय के गोबर से बने दिए व अन्य कई घरेलू सामान विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

अधिकारियों ने भी चाक पर आजमाया हाथ

दीया-बाती प्रदर्शनी में गंवई परिवेश को दिखाने के लिए कुम्हारों का चाक, बैल—गाड़ी, अन्य गांव की पुरानी परम्पराओं से जुड़ी चीजें थीं। कुम्हारी कला पर हाथ आजमाते हुए एसडीएम सदर राजेश यादव व बीएसए शिवनारायण सिंह ने चाक चलाकर दिए बनाने का प्रयास किया। वहां मौजूद कुम्हारों के सहयोग से कई दिए भी बना डाले। निश्चित रूप से यह कुम्हारी कला को प्रोत्साहित करने वाला क्षण था। जिलाधिकारी समेत वहां मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने लोगों से मिट्टी से बने सामानों का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करने की अपील की।