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CPEC की आड़ में 5 साल से चीन-पाक मिलकर बना रहे जैविक हथियार, रिपोर्ट में खुलासा
August 27, 2020 • परिवर्तन चक्र
 
चीन की वुहान लैब पाकिस्तान के साथ मिलकर पिछले पांच सालों से खतरनाक जैविक हथियारों पर प्रयोग कर रही है. चीन और पाकिस्तान अपने इकोनॉमिक कॉरिडोर और सड़क निर्माण के नाम पर दुनिया को धोखा दे रहे हैं. ये दोनों देश एक साथ मिलकर बायो वेपन यानी जैविक हथियार बनाने में लगे हुए हैं. इस बात का खुलासा एक ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट द क्लाक्सोन ने किया है. 
 
 
द क्लाक्सोन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि चीन और पाकिस्तान की सेना ने पिछले महीने चुपके से तीन साल की डील की है. इस डील के तहत वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में संभावित जैविक हथियारों को विकसित करने का समझौता भी शामिल है. इसके साथ ही यह खुलासा भी हुआ है कि वुहान स्थित लैब पाकिस्तान के साथ साल 2015 से ही खतरनाक बैक्टीरिया-वायरस पर प्रयोग कर रही है. 
 
वुहान और पाकिस्तान के वैज्ञानिकों ने अब तक पांच स्टडीज की है. इन स्टडीज को साइंटिफिक पेपर्स में भी प्रकाशित कराया गया है. सभी स्टडीज में zoonotic pathogens यानी पशुजन्यरोग की खोज और लक्षण के बारे में चर्चा की गई है. zoonotic pathogens की वजह से ऐसी संक्रामक बीमारियां होती हैं जो जानवरों से इंसानों में फैलती हैं. जैसे अभी कोरोना वायरस फैला हुआ है. 
 
द क्लाक्सोन ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि इन पांचों स्टडीज में कई घातक और संक्रामक बीमारियों के जीनोम सिक्वेंसिंग के बारे में भी लिखा है. ये बीमारियां हैं- वेस्ट नाइल वायरस (West Nile Virus), मर्स कोरोना वायरस (MERS-Coronavirus), क्रिमियन-कॉन्गो हेमोरेजिक फीवर वायरस (Crimean-Congo Hemorrhagic Fever Virus), द थ्रोम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम वायरस (Thrombocytopenia Syndrome Virus) और चिकनगुनिया वायरस (Chikungunya Virus). 
 
एक रिसर्च में पाकिस्तान ने वुहान इंस्टीट्यूट को वायरस संक्रमित सेल्स मुहैया कराने के लिए शुक्रिया भी कहा था. इसके साथ ही रिसर्च को CPEC के तहत मिले सहयोग का भी जिक्र किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च के लिए हजारों पाकिस्तानी पुरुषों, महिलाओं और बच्चों का ब्लड सैम्पल लिया गया. इनमें वे लोग शामिल थे जो जानवरों के साथ काम करते थे. दूरदराज के इलाकों में रहते थे. 
 
ऑस्ट्रेलियाई वेबसाइट का कहना है कि चीन और पाकिस्तान एक समझौते के तहत संक्रामक बीमारियों पर शोध कर रहे हैं. हालांकि, इसकी आड़ में जैविक हथियारों के लिए रिसर्च की जा रही है. फिलहान इन वायरस से बचने की कोई वैक्सीन या सटीक इलाज नहीं है. इनमें से कुछ को दुनिया के सबसे घातक और संक्रामक वायरस माना जाता है. 
 
जिन पांच स्टडीज का जिक्र आस्ट्रेलियाई वेबसाइट कर रही है. उसमें चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत मदद मिलने का जिक्र भी किया गया है. यहां पर लिखा गया है कि International Cooperation on Key Technologies of Biosafety along the China-Pakistan Economic Corridor. 
 
यानी CPEC के साथ बायोसेफ्टी संबंधी महत्वपूर्ण टेक्नोलॉजीस पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग. यहां अंतरराष्ट्रीय सहयोग वाले हिस्से को लेकर कभी सार्वजनिक घोषणा नहीं हुई. 
 
साल 2018 में पाकिस्तान की सरकार CPEC से पीछे हटना चाहती थी लेकिन पाकिस्तान की सेना जो वहां ज्यादा ताकतवर है, उसने डील रद्द करने से मना कर दिया. पाकिस्तान की सेना ने कहा कि वह हर कीमत पर इस समझौते को जारी रखना चाहती है.
 
द क्लाक्सोन की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के वुहान लैब में पाकिस्तानी वैज्ञानिकों को जैविक हथियारों के विकास, संचालन और प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जा रही है. ताकि ये भविष्य में अपने देश में ही जैविक हथियारों का जखीरा बना सकें. 
 
वुहान लैब ने पाकिस्तानी सेना के डिफेंस एंड टेक्नोलॉजी ऑ़र्गेनाइजेशन (DESTO) के साथ समझौता किया है जिसमें इसके वैज्ञानिक तेजी से फैल रहे संक्रामक रोगों पर अध्ययन करेंगे. ताकि इन बीमारियों को रोका जा सके. लेकिन यह सच नहीं दिखता.