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चीन के नरभक्षी लोग, नपुंसकता दूर करने के लिए खा जाते हैं मां का गर्भनाल !
June 25, 2020 • परिवर्तन चक्र

नई दिल्ली। इन दिनों दुनियाभर में कोरोना वायरस को लेकर चिंता की जा रही है। सबसे पहले ये वायरस चीन में पाया गया था। जानकारों का मानना है कि ये वायरस चीन में जंगली खाने कि वजह से जानवरों से इंसानों तक पहुंचा है।

चीनी लोग कुत्ते से लेकर बिल्ली जैसे जानवरों के मांस को बड़े चाव से खाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यहां के लोग एग्जोटिक मीट के अलावा मां की गर्भनाल (human placenta) और बच्चों का मांस भी खा जाते हैं। हालांकि,इसे सोग भूख मिटाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए खाते हैं।

चीनी लोगों का मानना है कि गर्भनाल (human placenta) और बच्चों के मांस से शरीर में गजब की ऊर्जा मिलती है। साथ ही, यौन शक्ति में भी इजाफा होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन में एक संतान पैदा करने का कानून है। ऐसे में दूसरा गर्भ ठहरते ही महिलाएं भ्रूण हत्या करा देती हैं, जिसकी वजह भ्रूण की आसानी से आपूर्ति हो जाती है।

इसके अलावा यहां के लोग गर्भनाल (human placenta) को भी बड़े चाव से खाते हैं। माना जाता है कि गर्भनाल में काफी सारे पोषक तत्व होते हैं और इन्हें खाना फायदेमंद रहता है. यही वजह है कि इस देश में न केवल मांएं अपना प्लेसेंटा खा रही हैं, बल्कि अस्पताल (hospital) में ही इसे चुराकर ऊंची कीमत पर बेचा भी जा रहा है।

यौन शक्ति को बढ़ाने के बच्चों और भ्रूण की कीमत चीन में 20 से 25 हजार रुपए है। वहीं, ताइवान में 4300 रुपए में बच्चों के भ्रूण मिल जाते हैं। हालांकि, ये गैरकानूनी है। इसके बावजूद लोग अवैध तरीके से भ्रूण की खरीददारी करते हैं।

इसके अलावा मां के प्लेसेंटा यानी गर्भनाल को भी लोग भारी कीमत पर खरीदते हैं। इसे चीनी भाषा में Ziheche कहते हैं। इसे सूप बनाकर तुरंत खाया जा सकता है। वहीं प्लेसेंटा को सुखाकर जादुई असर वाली दवा की तरह भी बेचा जाता है। नपुंसकता के इलाज में भी इसे काफी असरदार माना जाता है। यही वजह है कि चीन में महिलाएं और पुरुष दोनों के बीच ही इसकी भारी मांग है।