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भरौली में लगी चौपाल, राजस्व व विकास कार्यों से जुड़ी चर्चा हुई
October 2, 2020 • परिवर्तन चक्र • बलिया समाचार
 
डीएम श्रीहरि प्रताप शाही ने हर किसी से की अपील, अपने गांव को बनाएं 'खुले में शौचमुक्त गांव
 
आसपास के दर्जन भर गांवों के प्रधान गण के साथ गंगा स्वच्छता पर विचार-विमर्श
 
बलिया। भरौली में गंगा किनारे चौपाल लगाकर स्थानीय लोगों व गंगा किनारे की उधर के करीब आधा दर्जन गांव के प्रधान गण के साथ गंगा स्वच्छता पर चर्चा की गई। प्रधानों ने भी अपने महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
 
जिलाधिकारी श्रीहरि प्रताप शाही ने कहा कि ग्राम पंचायत चाहे तो सोख्ता बनवाकर गंगा में छोटी-मोटी नालियों का पानी गिरने से रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि अगर अभी भी हर घर शौचालय नहीं है या प्रयोग नहीं हो रहे हैं तो इस पर प्रधान व वरिष्ठ लोगों को ध्यान देना होगा। सब मिलकर ऐसा करें कि गांव के लोग जागरूक हों और आपका गांव शत प्रतिशत 'खुले में शौचमुक्त' गांव हो जाए। जिलाधिकारी ने विशेष जोर देकर कहा कि हर गांव में बेहतर पंचायत भवन और सामुदायिक शौचालय होना चाहिए। अगर कहीं जमीन की उपलब्धता या कोई और समस्या है तो बताएं। पंचायत भवन उस ग्राम का सचिवालय होगा, इसलिए उस तरह का बनना भी चाहिए। वहां पंचायत सचिव, लेखपाल आदि के बैठने का समय तय होगा। ग्राम प्रधान लोगों से अपील किया कि जो कार्यकाल बचा है, उसमें बेहतर कार्य कराकर उस कार्यकाल को उपयोगी बनाएं, ताकि वह यादगार बन सके। वातावरण को कैसे स्वच्छ रखा जाए, इस संबंध में भौगोलिक जानकार गणेश पाठक ने विस्तार से बताया।
 
शौचमुक्त व पॉलीथिनमुक्त गांव बनाएं : विपिन जैन
 
चौपाल में सीडीओ विपिन जैन में कहा कि गंगा हमारे लिए जीवनदायिनी है। गंगा है तो हम हैं। इसलिए गंगा का ख्याल रखना भी हम सबकी जिम्मेदारी है। गंगा को स्वच्छ रखने के लिए हम जो कुछ भी कर सकते हैं, करें। लोगों को जागरूक करना ही इस गंगा यात्रा का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए हम सबको अपने व्यवहार में परिवर्तन करना होगा। सबसे पहले अपने गांव को शौचमुक्त व पॉलीथिनमुक्त गांव बनाने का प्रयास करें। हर कोई शौचालय का प्रयोग करे, खुले में कत्तई न जाएं। पॉलीथिन के प्रयोग से बचें और दूसरे को भी इसका प्रयोग नहीं करने के लिए प्रेरित करें। गंगा किनारे गांव के लोग ऐसा करके अपने गांव को स्वच्छ गांव तो बना ही सकते हैं, साथ ही मोक्षदायिनी गंगा को भी काफी हद तक साफ-सुथरा रख सकते हैं।
 
सचिवों की तरह लेखपालों का भी बन जाए रोस्टर
 
चौपाल में लेखपालों के बैठने का कोई समय नहीं होने व गांव के लोगों से नहीं मिलने की बात सामने आई। इस पर जिलाधिकारी ने एसडीएम सदर राजेश यादव को निर्देश दिया कि पंचायत सचिवों का जिस तरह रोस्टर बना है उसी प्रकार लेखपालों का भी बना दें। तहसीलदार व कानूनगो के जरिए उस रोस्टर का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। साफ कहा कि हल्के का लेखपाल उस हल्के के लोगों के लगातार सम्पर्क में रहना चाहिए। वर्तमान में चल रहे राजस्व सम्बन्धी अभियान पर भी नजर रखें। 
 
कुंओं व अन्य प्राकृतिक स्रोत को जीवंत रखने पर विशेष फोकस
 
जिलाधिकारी ने पूरी यात्रा व चौपाल के दौरान गांव में मौजूद कुंओं, तालाब जैसे प्राकृतिक स्रोतों को जीवंत रखने के प्रयास पर विशेष ध्यान देने को कहा। उन्होंने बताया कि आर्सेनिक की समस्या जिन गांवों में है वहां कुंवे किसी वरदान से कम नहीं। आने वाली पीढ़ियों को जल प्रदूषण की आपदा से बचाने के लिए कुंओं का संरक्षण अत्यंत जरूरी है। जिलाधिकारी ने गांवों में खतौनी पढ़ने व वरासत करने, चकमार्गों से अतिक्रमण हटवाने और कुंवा, तालाब चिन्हित करने से सम्बन्धित राजस्व विभाग के अभियान की भी जानकारी लेखपाल व कानूनगो से ली। उन्होंने ग्रामीणों को भी इस अभियान के बारे में बताया और नजर रखने की बात कही।
 
जागरूकता व निगरानी कार्य में बच्चे होंगे कारगर
 
यात्रा के दौरान ग्राम सरयां के प्रधान जेपी उपाध्याय ने बताया कि प्रायः लोगों को आदत सी बन गई है कि सुबह गंगा की तरफ आते हैं, शौच करते हैं, गंगा में नहाते हैं और पूजा कर घर चले जाते हैं। खुले में शौच से कोई रोके-टोके तो बुरा भी मान सकते हैं। यही बात अन्य प्रधान गण ने भी दोहराई। इस पर सीडीओ विपिन जैन ने सुझाव दिया कि ग्राम पंचायतों में लोगों को जागरूक करने और खुले में शौच को जाने वालों को टोकने के लिए बच्चों की टीम का उपयोग हो तो काफी कारगर होगा। वहीं, जिलाधिकारी ने कहा कि किनारे के गांवों में शीघ्र सामुदायिक शौचालय बनवाकर गंगा किनारे शौच की समस्या से निजात दिलाई जाए।