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भारत, अमेरिका और यूरोप में आई कोरोना की दूसरी लहर, बद से बत्तर हो सकते हैं हालात
November 20, 2020 • परिवर्तन चक्र • कोरोना वायरस

कोरोना संक्रमण मामले में अमेरिका, भारत और ब्राज़ील टॉप में हैं। इसके बाद के सभी देश यूरोप के हैं जहां कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है।

जानकारों के मुताबिक आने वाले महीनों में यहां कोरोना का संक्रमण पहले वेव से भी अधिक तेज होगा।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस को एक साल पूरे हो चुके हैं। बीते साल नवंबर में ही चीन के वुहान में कोरोना का पहला मामला सामने आया था। लेकिन इन एक साल में वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 5.56 करोड़ से भी अधिक हो गई। वहीं 13.4 लाख से अधिक लोग इस महामारी से लड़ते हुए अपनी जान गंवा दिए । जानकारों का मानना था कि कोरोना एक साल में धीमा हो जाएगा लेकिन परिणाम देख कर लगता है कि कोरोना की सेकंड वेव ने दुनिया भर में कहर ढाना शुरू कर दिया है।

अमेरिका, भारत में बढ़ रहा संक्रमण

अमेरिका, भारत और यूरोप में नवंबर के महीने कोरोना संक्रमितों की संख्या में फिर से इजाफा देखने को मिल रहा है। अमेरिका में 1 करोड़ से अधिक लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 2.52 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। बात भारत की करें तो यहां के हालात भी बद से बत्तर होते जा रहे हैं। देश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 90 लाख पार हो चुकी है। वहीं 1.32 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में कोरोना की दूसरी लहर का आना किसी बड़े खतरे से कम नहीं है।

WHO के मुताबिक कुछ दिनों पहले अमेरिका में फिर से एक दिन में एक लाख से ज़्यादा केस दर्ज किए गए। वहीं भारत में भी केस बढ़ने की आशंका है। जानकारों के मुताबिक आने वाले दिनों में भारत में कोरोना संक्रमण बहुत तेजी से फैलेगा। इन दोनों देशों के अलावा कोरोना ने यूरोप में भी आतंक मचा रखा है। बीते कुछ दिनों से यहां भी हजारों की संख्या में केस सामने आ रहे हैं।

WHO की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना संक्रमण मामले में अमेरिका, भारत और ब्राज़ील टॉप में हैं। इसके बाद के सभी देश यूरोप के हैं जहां कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। जानकारों के मुताबिक आने वाले महीनों में यहां कोरोना का संक्रमण पहले वेव से भी अधिक तेज होगा।

इसके अलावा रॉयल सोसाइटी ओपन साइंस नामक पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट में बताया गया कि ब्रिटेन, फ्रांस, बेल्जियम और इटली में कोरोना वायरस संक्रमण दर ज्ञात मामलों की तुलना में बहुत अधिक है और इटली के मामले में तो यह 17 गुना अधिक है।

फिर से क्यों बढ़ रहा संक्रमण?

अब सवाल ये है इन्हीं देशों में क्यों कोरोना ने आतंक मचा रखा है। बाकी के देश कोरोना की दूसरी लहर से अब तक कैसे बचे हैं। दरअसल, ये देश कोरोना की पहली लहर से कभी उबर ही नहीं पाए थे यही वजह है यहां कोरोना की दूसरी लहर अन्य देशों से ज्यादा खतरनाक दिख रही है। उदाहरण के लिए भारत के दिल्ली को ले लेते हैं। यहां कोरोना का संक्रमण हमेशा से तेज रहा है। 15 नवंबर तक यानी आधे महीने में यहां 98 हज़ार से ज़्यादा केस दर्ज हुए जो अक्टूबर के मुकाबले 25.5 फीसदी से ज़्यादा रहे।

इसकी एक वजह ये भी यहां कोरोना पर कभी पूरी तरह से काबू पाया ही नहीं गया था। राज्य में थोड़ी छूट मिलने के बाद लोग बेकाबू होकर घर से निकलने लगे। सरोजनी नगर से लेकर लाजपत नगर तक हर जगह की बाजारें पहले की तरह खुल रही है और हजारों की संख्या में लोग भी जा रहे हैं। इसके अलावा बीते दिनों त्योहार में भी बाजार में भारी संख्या में भीड़ देखने को मिली थी। ऐसे में कोरोना का संक्रमण कभी कम ही नहीं हो पाता। ऐसे ही हालत अमेरिका और यूरोप के देशों के भी हैं।

लग रहा फिर से लॉकडाउन

बात यूरोप की करें तो यहां के कई देश कोरोना की सेकंड वेव से प्रभावित हैं। इनमें सबसे ऊपर फ्रांस है, जहां 15 नवंबर तक करीब सवा छह लाख नए केस दर्ज हुए हैं, जो अक्टूबर के मुकाबले 46 फीसदी से ज्यादा आंकड़ा है। यूरोप में बढ़ते संक्रमण की वजह से कई देशों में फिर से लॉकडाउन लगाया जा रहा है। महीने के शुरुआत में फ्रांस में चार हफ्ते के लॉकडाउन का ऐलान किया गया था।

फ्रांस के अलावा अभी कुछ दिनों पहले इंग्लैंड में भी चार हफ्ते का लॉकडाउन लगाया गया था। इसके तहत पब, रेस्तरां, गैर जरूरी दुकानें और दूसरी सुविधाओं के संचालन पर पाबंदी लगाई गई है। महामारी विशेषज्ञों की चेतावनी के अगर कुछ दिनों तक ऐसे ही हालात रहते हैं तो कई देशों में कई महीनों तक की लॉकडाउन और शटडाउन की नौबत आ जाएगी।

साभार-पत्रिका