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बैंक कर्मचारियों की मांग, हमें कोरोना का खतरा, सप्ताह में 5 दिन हो काम
July 20, 2020 • परिवर्तन चक्र

कोरोना काल में भी लगातार काम करने वाले बैंक कर्मचारियों ने अब सप्ताह में 5 दिन के वर्किंग डेज की मांग की है। बैंक कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि उन्हें कोरोना के दौर में भी बैंकों में जाकर काम करना पड़ रहा है और पब्लिक डीलिंग करनी पड़ती है।

कोरोना काल में भी लगातार काम करने वाले बैंक कर्मचारियों ने अब सप्ताह में 5 दिन के वर्किंग डेज की मांग की है। बैंक कर्मचारी यूनियनों ने मांग की है कि उन्हें कोरोना के दौर में भी बैंकों में जाकर काम करना पड़ रहा है और पब्लिक डीलिंग करनी पड़ती है। ऐसे में उन्हें 5 वर्किंग डेज की सुविधा दी जानी चाहिए। इससे पहले भी जनवरी में बैंक कर्मचारियों ने यह मांग की थी, लेकिन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने उनकी मांग क खारिज कर दिया था। हालांकि तब एसोसिएशन ने उनकी सैलरी में 19 पर्सेंट तक के इजाफे की मांग को स्वीकार कर लिया था। फिलहाल बैंक कर्मचारियों को महीने के हर रविवार और दूसरे एवं चौथे शनिवार को छुट्टी मिलती है।

ऑल इंडिया बैंक एंप्ल़ॉयीज एसोसिएशन ने बयान जारी कर कहा है कि कोरोना वायरस का खतरा बैंक कर्मचारियों पर भी मंडरा रहा है। बैंक एसोसिएशन ने कहा कि कर्मचारियों को हर दिन बड़ी संख्या में लोगों के बीच काम करना होता है। ऐसी स्थिति में सप्ताह में 5 वर्किंग डेज किया जाना बेहद जरूरी है।

एसोसिएशन ने कहा कि पूरी दुनिया चार वर्किंग डेज पर बढ़ गई है। ऐसी स्थिति में हमें भी बैंक कर्मचारियों को 5 वर्किंग डेज दिया जाना चाहिए। ऑल इंडिया स्टेट बैंक ऑफिसर्स फेडरेशन के प्रेसिडेंट दीपक शर्मा ने कहा, ‘ऐसा कदम पीएम नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया विजन के मुताबिक भी एक उचित कदम होगा।’

बैंक कर्मचारी यूनियनों का कहना है कि भारत में बैंकों में काम की स्थिति खराब है। इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी है। इसके अलावा स्टाफ की भी कमी है। ऐसी स्थिति में अधिकारियों को लंबे समय तक काम करना पड़ रहा है। इसके चलते उनके स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है। दीपक शर्मा ने कहा कि अधिकारियों को छुट्टी के दिनों में और रविवार तक में बुलाया जा रहा है। इससे उनके निजी जीवन पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण से निपटने के लिए लागू लॉकडाउन की अवधि में भी सरकार ने बैंकों को सुचारू तौर पर काम करने का आदेश दिया था। हालांकि बैंकों में पेमेंट, डिपॉजिट और सैलरी जारी करने जैसे कुछ जरूरी काम ही किए जा रहे थे।