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आतंकियों को फांसी की सजा देने वाले जज को जान का खतरा, सुरक्षा की लगाई गुहार
September 11, 2020 • परिवर्तन चक्र • क्राइम न्यूज
 

अपने पत्र में जज अजय शर्मा ने कहा है कि घर के बाहर संदिग्ध लोग बाइक से चक्कर लगाते हैं और घर के बाहर खाली शराब की बोतलें फेक जाते हैं. कई बार घर के बाहर खड़े होकर घर के फोटो भी खींचते हैं.

  • जज ने 4 आतंकियों को दी है फांसी की सजा
  • खाली शराब की बोतलें फेंक जाते हैं कुछ लोग
  • जज के घर के बाहर चक्कर लगाते हैं संदिग्ध
जयपुर बम ब्लास्ट के चार आतंकियों को फांसी की सजा सुनाने वाले रिटायर्ड जज अजय कुमार शर्मा ने राजस्थान के डीजीपी को पत्र लिखकर कहा है कि उनकी जान को खतरा है. जज अजय कुमार शर्मा ने खुद की और परिवार की सुरक्षा के लिए राजस्थान के डीजीपी से सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा है. 

बता दें, जयपुर में 13 मई 1998 को सीरियल ब्लास्ट हुआ था जिसके आरोपियों को जज अजय कुमार शर्मा ने फांसी की सजा सुनाई थी. राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जज अजय कुमार शर्मा ने कहा है कि आईबी की रिपोर्ट के अनुसार उनके और उनके परिजनों से आतंकी कभी भी बदला ले सकते हैं. पुलिस लाइन के अधिकारी बता रहे हैं कि उनकी सुरक्षा वापस ली जा रही है. यदि सुरक्षा हटाई जा रही है तो उसे बरकरार रखा जाए.

अपने पत्र में जज अजय शर्मा ने कहा है कि घर के बाहर संदिग्ध लोग बाइक से चक्कर लगाते हैं और घर के बाहर खाली शराब की बोतलें फेंक जाते हैं. कई बार घर के बाहर खड़े होकर घर के फोटो भी खींचते हैं. जज ने कहा है कि इसी तरह से नीलकंठ गंजू ने आतंकी मकबूल भट्ट को 1984 में मौत की सजा सुनाई थी जिसके बाद 2 अक्टूबर 1989 को जज गंजू की हत्या कर दी गई थी. 

जयपुर बम ब्लास्ट की विशेष अदालत में जज बनाने के साथ ही जज अजय कुमार शर्मा को चार गार्ड और दो पीएसओ की सुरक्षा मिली हुई थी. उनके 31 जनवरी 2020 को रिटायर होने के बाद भी उनके साथ बनी हुई है. अब सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें डीजीपी से अतिरिक्त सुरक्षा की मांग की है. पत्र में उन्होंने लिखा है कि उनके और उनके परिवार को जान का खतरा है, लिहाजा पुलिस सुरक्षा का बंदोबस्त करे. v