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आईये जाने इन पांच युवाओं ने मात्र 22 साल की उम्र में IAS बनकर सफलता का परचम लहराया
August 6, 2020 • परिवर्तन चक्र

हमारे देश में प्रतिभाशाली छात्रों की कोई कमी नहीं है। UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा 2019 का फाइनल रिजल्ट 4 अगस्त 2020 को घोषित कर दिया है।सफलता अमीरी, गरीबी कद और उम्र की मोहताज नही होती है। जिस उम्र के युवा अपनी ज़िंदगी ऐशो -आराम से व्यतित करना चाहते हैं, वही हमारे देश के 5 युवाओं ने विषम परिस्थितियों का सामना करते हुए अपने मेहनत से इतिहास रचा है।

आईये जानते हैं इन 5 युवाओं के बारे मे जिन्होंने महज 22 वर्ष की उम्र मे IAS ऑफिसर बनकर इतिहास रचा जो आज के युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है

UPSC परीक्षा 2019 में प्रदीप सिंह 26वां स्थान प्राप्त कियें हैं। जब Pradeep 22 साल के थे तब इन्होंने 2018 में भी परीक्षा दिया और उसमे 93वा रैंक प्राप्त कर IAS ऑफिसर बने थे । इस बार UPSC की परीक्षा में प्रदीप ने 26वां स्थान लाकर अपने पूरे परिवार को गौरवान्वित किया है । प्रदीप का जन्म बिहार के गोपालगंज जिले में हुआ लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण इनका परिवार इंदौर गया और वहां रोजगार ढुंढ अपना जीवनयापन करने लगा। Pradeep अभी IRS में “असिस्टेंट कमिश्नर” के रूप मे कार्यरत हैं। इन्होंने 10वीं और 12वीं क्लास में 81% अंक प्राप्त किया था फिर वह “आईआईपीएस डीएवीवी” इंदौर से रसायन शास्त्र से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कि और आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गये।

अंसार शेख का जन्म मराठवाड़ा के शेलगांव मे हुआ। यह देश के सबसे कम उम्र में आईएएस ऑफिसर बनने वाले युवाओं मे से एक हैं। अंसार के पिता रिक्शा चालक हैं। Ansar शेख ने 2015 में UPSC की परीक्षा पास कर 361वीं रैंक प्राप्त कर IAS बने थे। अंसार ने अपनी स्कूलिंग की पढ़ाई जिला परिषद स्कूल से पूरी की, 12वीं कक्षा मे अंसार ने 91% अंक लाकर जिन्दगी की पहली कड़ी को सफलता से पुरा किया फिर शुरू हुआ IAS बनने का सफर।

रोमन सैनी का जन्म राजस्थान के जयपुर मे हुआ । रोमन यूपीएससी परीक्षा 2013 में 18वीं रैंक हासिल कर IPS बने , फिर जबलपुर में सहायक कलेक्टर के रूप मे कार्यरत हुए। इनके पिता इंजिनियर हैं। इन्होंने IAS की तैयारी के लिए अपनी एक संस्था खोली जिसका नाम “अनएकेडमी” रखा, इस संस्था मे यह online क्लास के जरिये छत्रों को पढ़ाना शुरू किए।

स्वाति का जन्म राजस्थान के सीकर जिले में हुआ, इन्होंने 2007 में हुए UPSC की परीक्षा में 260वीं रैंक हासिल किया और IAS ऑफिसर बनी। एक लम्बी अवधि के बाद स्वाति 2012 में मन्डला जिले के कलक्टर के रूप मे नियुक्त हुई। आगे चल कर इन्होंने मध्य प्रदेश के “स्टेट कॉपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन” मे अपना पदभार संभाला। इन्हे ‘नो नॉनसेंस एडमिनिस्ट्रेटर’ के नाम से भी जाना जाता है।

अंकुर पंजाब के पटियाला के निवासी हैं। इन्होंने 2002 मे हुए UPSC परीक्षा मे पहला रैंक हासिल किया और IAS ऑफिसर बने। इन्होंने IIT दिल्ली से अपनी स्नातकोतर की शिक्षा संपन्न की, साथ ही “प्रतिष्ठत हार्वर्ड यूनिवर्सिटी” से 2 साल का मास्टर कोर्स भी किया। इनके पिता एक सर्जन है।

इन प्रतिभावान युवाओं के प्रयास को The Logically नमन करता है !