ALL क्राइम न्यूज स्वास्थ्य घरेलू नुस्खे उत्तर प्रदेश अध्यात्म कोरोना वायरस देश बलिया समाचार दुष्कर्म मनोरंजन
60 साल से कम उम्र वाले मोटे पुरुषों की कोरोना से मौत ज्यादा, स्टडी में खुलासा
August 24, 2020 • परिवर्तन चक्र

कोरोना वायरस मोटे लोगों पर कहर बनकर टूट रहा है. हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोना वायरस की वजह से 60 साल से कम मोटी महिलाओं की तुलना में मोटे पुरुषों की ज्यादा मौत हो रही है. इसका मतलब ये है कि ज्यादा खतरा मोटे लोगों पर तो है ही साथ ही अगर उनकी उम्र भी ज्यादा हुई तो कोरोना से बचाव बेहद जरूरी है.

कैसर परमानेंटे साउर्दन कैलिफोर्निया हेल्थ सिस्टम (Kaiser Permanente Southern California Health System) के शोधकर्ताओं ने 7000 कोरोना केस की स्टडी की है. उन्होंने पाया कि अगर बाकी सारी बीमारियां और परिस्थितियां हटा दी जाएं तो सिर्फ मोटापा अकेला ऐसा कारण है जिसकी वजह से 60 साल से कम पुरुषों की ज्यादा मौत हो रही है.

स्टडी में बताया गया है कि अत्यधिक मोटे लोगों के शरीर का BMI (Body Mass Index) 40 प्वाइंट से ज्यादा है तो कोरोना की वजह से उनकी मौत की आशंका तीन गुना बढ़ जाती है. अगर यह 45 पार करता है तो मौत की आशंका चार गुना ज्यादा हो जाती है. दोनों ही स्थितियों में पुरुषों की हालत ज्यादा खराब है. जबकि, महिलाएं इससे तुलनात्मक रूप से बची हुई हैं.

इसके पहले भी ये सवाल उठा था कि कि क्या कोरोना वायरस मोटे यानी ज्यादा वजनी लोगों को अधिक नुकसान पहुंचाता है? तो आप ये जान लें कि यूरोप के नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के मुताबिक यूरोप में जितने भी लोग बीमार हुए हैं उनमें से दो तिहाई मोटे लोग हैं. NHS मुताबिक अगर आपके शरीर में जरूरत से ज्यादा चर्बी है, आपका बॉडी मास इंडेक्स (BMI) ज्यादा है. तो आपके लिए कोरोना वायरस का खतरा बढ़ जाता है.

यूरोप में कोरोना वायरस की वजह से गंभीर रूप से बीमार लोगों में दो तिहाई लोग मोटे हैं. NHS ने यह भी बताया कि गंभीर रूप से बीमार लोगों में 40 फीसदी लोग 60 साल से नीचे हैं और मोटे हैं. आपको बता दें कि अकेले यूनाइटेड किंगडम में कोरोना से संक्रमित कुल मरीजों में से 63 प्रतिशत ICU में हैं. ये सारे के सारे मोटे हैं या ज्यादा बीएमआई वाले हैं.

मार्च के महीने में यूके में एक समय में करीब 194 लोग ICU में एडमिट हो रहे थे. इनमें से करीब 130 लोग अपने शरीर के मुताबिक ज्यादा वजनी हैं. ICU में एक समय में भर्ती 194 लोगों में से 139 मरीज पुरुष हैं. यानी करीब 71 फीसदी. जबकि, महिलाएं 57 भर्ती हो रही हैं. यानी 29 प्रतिशत. इन मरीजों में से 18 मरीज ऐसे होते हैं जिनको फेफड़ों या दिल संबंधी बीमारी होती है. यानी मोटापे की वजह से जन्मी बीमारियां आदि.

पहले भी कई बार ऐसे अध्ययन हो चुके हैं जिसमें बताया गया था कि मोटे लोगों को संक्रमण का खतरा ज्यादा रहता है. साथ ही इन्हें फेफड़े से संबंधित बीमारियों के होने की आशंका भी ज्यादा रहती है. डॉक्टरों का भी मानना है कि मोटे लोगों के शरीर की प्रतिरोधक क्षमता उतनी अच्छी नहीं होती जितने दुबले या फिट लोगों की होती है. क्योंकि ये लोग फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स वाले भोजन नहीं करते. इससे इनका इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है.

ज्यादा वजन होने से या मोटापा होने की वजह से शरीर के डायाफ्रॉम और फेफड़ों को फूलने-पिचकने में दिक्कत होती है. यानी भरपूर सांस लेने में दिक्कत होती है. मोटे लोगों की सांस जल्दी फूलने लगती है. इसलिए उनके शरीर के अंगों तक ऑक्सीजन की भरपूर मात्रा नहीं पहुंचती.