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"राजभाषा सप्ताह" : राजभाषा पत्रिका "रेल रश्मि’’ के 82वें अंक का हुआ विमोचन
September 17, 2020 • परिवर्तन चक्र

गोरखपुर 17 सितम्बर, 2020। पूर्वोत्तर रेलवे राजभाषा विभाग के तत्त्वावधान में मुख्यालय, गोरखपुर में मनाये जा रहे 14 से 18 सितम्बर, 2020 तक राजभाषा सप्ताह समारोह- 2020 के आयोजन के क्रम में 17 सितम्बर, 2020 को ’’कबीर की सामाजिक चेतना विषय पर मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में हिन्दी कार्यशाला का वर्चुअल रूप से आयोजन किया गया। 

मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा कि आज की हिंदी संगोष्ठी में पूर्व मुख्य परिचालन प्रबन्धक श्री राकेश त्रिपाठी द्वारा कबीर की सामाजिक चेतना विषय पर तथ्यपरक, सारगर्भित और रोचक जानकारी दी गई। मुख्य राजभाषा अधिकारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस रेल पर राजभाषा के प्रयोग-प्रसार संतोषजनक है। श्री पाण्डेय ने कहा कि संत कबीर ने दोहों के माध्यम से वास्तविक सच्चाई के प्रति आम नागरिकों के मन में सुधार लाना शुरू किया था। उन्होंने हमेशा मुक्ति के साधन के रूप में पारंपरिक तरीकों पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार, जिस व्यक्ति के दिल में अच्छाई होती है, उसमें पूरी दुनिया की समृद्वि शामिल होती है। मैं राजभाषा विभाग को साधुवाद देता हॅू कि उन्होंने हिंदी सप्ताह समारोह के दौरान इस तरह की संगोष्ठियां का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा विष्वास है कि हमारे रेल कर्मियों के लिये आज की यह संगोष्ठी काफी लाभप्रद सिद्व होगी।  

इस अवसर पर मुख्य राजभाषा अधिकारी एवं प्रमुख मुख्य यांत्रिक इंजीनियर श्री अरविन्द कुमार पाण्डेय ने राजभाषा पत्रिका रेल रश्मि’’ के 82वें अंक का विमोचन किया।

मुख्य वक्ता, पूर्व मुख्य परिचालन प्रबन्धक श्री राकेश त्रिपाठी ने कबीर की सामाजिक चेतना विषय को समाहित करते हुए कबीर के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तृत रूप से प्रकाष डाला। श्री त्रिपाठी ने कहा कि समाज में कबीर को जागरण का अग्रदूत कहा जाता है। संत कबीर संकीर्ण चिन्तनधाराओं से हमेशा दूर रहते थे। उन्होंने कभी भी अपने आपको किसी एक धर्म संप्रदाय की सीमा में नहीं रहने दिया। संत कबीर हिंदी साहित्य के भक्ति काल के इकलौते ऐसे कवि है, जो आजीवन समाज और लोगों के बीच व्याप्त आडंबरो पर कुठाराघात करते रहे। लोक कल्याण हेतु ही मानो उनका समस्त जीवन था।

इस अवसर पर उप मुख्य राजभाषा अधिकारी श्री ओमकार नाथ सिंह ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे, मुख्यालय द्वारा 14 से 18 सितम्बर, 2020 तक राजभाषा सप्ताह समारोह का आयोजन किया जा रहा है। आज की साहित्यिक संगोष्ठी उसी की एक कड़ी है। कार्यालयों में इस तरह के संगोष्ठियों के आयोजन से न केवल हमारा उत्साहवर्धन होता है बल्कि अपने देष के धरोहर के रूप में गौरवशाली प्रतिभाओं से सम्पन्न मनीषियों के बारे में जानने और उनसे प्रेरणा लेने का अवसर मिलता है।

इस संगोष्ठी में बीज वक्तव्य राजभाषा अधिकारी श्री ध्रुव कुमार श्रीवास्तन ने किया।

कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ अनुवादक श्रीमती अनामिका सिंह ने किया।

कार्यशाला में विभिन्न विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया। अन्त में राजभाषा अधिकारी श्री अरशद मिर्जा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

राजभाषा सप्ताह समारोह-2020 के क्रम में 18 सितम्बर, 2020 को अपराह्न 16-30 बजे से वर्चुअल काव्य गोष्ठी का आयोजन किया जायेगा।